अलग-अलग धर्म सत्य को अलग शव्दों और प्रतीकों से व्यक्त करते हैं: आपका मार्गदर्शक आपके पूज्य गुरुदेव
🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏🌹🌹"सादर जय सियाराम"
मतभेद सत्य में नहीं अपितु मनुष्य की समझ और व्याख्या में होती है ।
धर्म रास्ता है , और मंजिल सत्य है ।
और जब लोग रास्ते को ही मंजिल समझ लेते हैं तभी संघर्ष शुरू होता है ।
सत्य को मानने के लिए विश्वास नहीं अपितु विनम्रता की आवश्यकता होती है ।
सत्य कभी विभाजित नहीं होता अपितु उस सत्य देखने वाली आंखें अलग होती है ।
दृष्टांत में में जैसे पानी को water और जल भी कहां जाता है ।
नाम बदलने से सत्य नहीं बदलता , वैसे ही अलग-अलग धर्म सत्य को अपनी भाषा और संस्कृति के अनुसार व्यक्त करते हैं ।
सत्य स्वयं नहीं बदलता है ।
अलग-अलग धर्म सत्य को अलग शव्दों और प्रतीकों से व्यक्त करते हैं ।
क्योंकि सत्य भाषा संस्कृति और समय बदलते हैं ।
लेकिन मनुष्य के मूल प्रश्र नहीं बदलता है ।
मैं कौन हूं , जीवन का उद्देश्य क्या है , और अंतिम सत्य क्या है
यह प्रश्र हर युग में रहता ही रहता है ।
आपका मार्गदर्शक आपके पूज्य गुरुदेव ,
संपूर्ण विश्व
संपर्क सूत्र:-6396372583,
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