जब तक भगवान के दर्शन नहीं, तब तक जीव को भगवत प्राप्ति नहीं: आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज
🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏🌹🌹"सादर जय सियाराम"
जीवन उसका सुखमय होता है ।
जिसके जीवन में जानकीजीवन की संजीवनी होती है ।
जिससे जीवन में जानकीजीवन की कथा होती हैं ।
हृदय की जलन तब तक नहीं जायेंगी जिय की जरन तब तक नहीं जायेंगी ।
जब तक भगवान का दर्शन नहीं होगा ।
जब तक जीव को भगवत प्राप्ति नहीं हों जाती है ।
"देखें बिनु रघुनाथ पद जिय कै जरनि न जाइ "
क्या वशिष्ठ जी ने हमारे ऊपर कम उपकार किया है ?
वशिष्ठ जी ने दोनों पक्षों रखा वशिष्ठ जी ने दोनों बात बताई वशिष्ठ जी ने जीने की कला बतायी और भागवत जी में व्यास जी ने मरने की कला बतायी ।
रामायण जी जीने की कला सिखाती है ।
और भागवत जी मरने की कला सिखाती है ।
मरन उसी का सिद्ध होता हैं ।
स्मरण जिसका शुद्ध होता हैं ।
और जीवन उसी का सुखमय होता है ।
जिससे जीवन में जानकीजीवन की संजीवनी होती है ।
आपका मार्गदर्शक आपके पूज्य गुरुदेव ,
[आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज]
संपूर्ण विश्व
संपर्क सूत्र :-6396372583,
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