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पौड़ी गढ़वाल: पगडंडियों से लेकर राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय फलक पर भारतीय समकालीन इतिहास में अपनी एक अमिट छाप छोड़ी

पगडंडियों से लेकर राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय फलक पर भारतीय समकालीन इतिहास में अपनी एक अमिट छाप छोड़ी 


 पौड़ी गढ़वाल 

ब्यूरो रिपोर्ट ttn24 

 पौड़ी की माटी एक ऐसा ध्रुवतारा जिसने गांव की पगडंडियों से लेकर राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय फलक पर भारतीय समकालीन इतिहास में अपनी एक अमिट छाप छोड़ी वह उत्तर प्रदेश के पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री डा. शिवानंद नौटियाल हैं। वह एक कुशल राजनीतिज्ञ, प्रखर वक्ता, पत्रकार व साहित्यकार रहे हैं। जन सरोकार को आजीवन सर्मपित रहे डा. नौटियाल के योगदान को देखते हुए सरकार ने उनके नाम से कई घोषणाएं तो की, लेकिन उन्हें अमल में लाना भूल गई। सरकार की उपेक्षा के चलते आज भी उनका पैतृक आवास संग्रहालय बनाए जाने की बाट जोह रहा है। इसी तरह कई घोषणाएं ऐसी हैं, जिन्हें आज भी सरकार के तंत्र के झंझावातों से निकलकर साकार होने का इंतजार है। 

जनपद पौड़ी गढ़वाल के कोठला गांव में 26 जून 1926 को चित्रमणी नौटियाल व दर्शनी देवी के घर बालक ने जन्म लिया। माता-पिता ने बच्चें का नाम शिवानंद रखा। बालपन से शिक्षा में बालक की रुचि को देखते हुए माता-पिता भी उत्साहित थे। प्राथमिक व उच्च प्राथमिक शिक्षा शिवानंद ने चाकीसैंण से ली। कक्षा 9 से 12वीं उत्तीर्ण मैसमोर इंटर कालेज पौड़ी से किया। उच्च शिक्षा डीएवी कॉलेज देहरादून और शोध लखनऊ विवि से पूरा किया। छात्र जीवन से ही शिवानंद के मन में पहाड़ की विषम भौगोलिक परिस्थितियां, यहां के लोगों की परेशानियां और उनके समाधान को लेकर मंथन चल रहा था। उन्होंने पहाड़ के सामाजिक सरोकार से जुड़कर सक्रीय राजनीति में कदम रखा। वर्ष 1967 में पौड़ी विधान सभा सीट से निर्दलीय ताल ठोकी। लेकिन 100 मतों के अंतर से हार गए। उसके बाद 1969 में हुए विधान सभा चुनाव में पौड़ी सीट से वह निर्दलीय जीत दर्ज कर पहली बार उत्तर प्रदेश की विधान सभा पहुंचे। इसके बाद उन्होंने 1972 पौड़ी दो दोबारा जीत दर्ज की। वर्ष 1974 में परिसीमन के बाद कर्णप्रयाग विधान सभा सीट से लगातार छह बार जीत दर्ज की। इस दौरान 1979 में वह उत्तर प्रदेश सरकार में उच्च शिक्षा व पर्वतीय विकास मंत्री रहे। वर्ष 1991 में वह आखिरीबार कर्णप्रयाग विधान सभा से विधायक रहे। 2 अप्रैल 2004 को उनका निधन हुआ। डा. नौटियाल एक सजग प्रहरी के रुप में पत्रकार का दायित्व भी निभाते रहे। वह दिल्ली से सेलोदे साप्ताहिक अखबार निकालते थे। साहित्य के क्षेत्र में वह मुखर हस्ताक्षर रहे हैं। उनके साहित्य सृजन संसार में 100 से अधिक रचनाएं हैं। डा. नौटियाल के अतुलनीय योगदान को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने कई घोषणाएं की। लेकिन उन घोषणाओं को सरकार अमल में लाना भूल गई है। उनके बेटे दिव्य नौटियाल ने बताया कि उत्तराखंड सरकार डा. शिवानंद नौटियाल के नाम से लगभग 57 घोषणाएं कर चुकी हैं। लेकिन उनके कुछ ही घोषाएं पूरी हो पाई हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र से लेकर राज्य सरकार की कई बड़ी घोषणाएं हैं। जो अभी तक केवल फाइलों में ही कैद है। सामाजिक कार्यकर्ता व ग्रामीण सुरेंद्र प्रसाद नौटियाल ने कहा कि सरकार ने डा. शिवानांद नौटियाल के पैतृक आवास को संग्रहालय बनाए जाने की घोषणा वर्ष 2016 में तत्कालीन केंद्रीय राज्यमंत्री व झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार व गढ़वाल सांसद बीसी खंडूड़ी ने की थी। स्थानीय विधायक व प्रदेश के शिक्षा मंत्री ने वर्ष 2021 में यही घोषणा दोहराई थी। लेकिन आज तक सुध नहीं ली गई है। 

गैरसैंण को यूपी की ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की पहल 

पौड़ी: गैरसैंण वर्तमान में उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी है। इसे स्थायी राजधानी घोषित किए जाने के लिए जनता लामबंद हैं। डा. शिवानंद नौटियाल ने यूपी विधान सभा में गैरसैंण को उत्तर प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाए जाने की पहल की थी। जिस पर सरकार ने हामी भरी थी। 


इन घोषणाओं को है सरकार की इनायत का इंतजार

- जनपद चमोली के गौचर स्थित हवाई पट्टी का नाम डा. शिवानंद नौटियाल के नाम किए जाने की घोषणा।

- डा. शिवानंद नौटियाल के मूल गांव कोठला में पैतृक आवास को संग्रहालय बनाए जाने की घोषणा। 

- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाबौ व पैठाणी का नाम डा. शिवानंद नौटियाल के नाम किए जाने की घोषणा। 

- उत्तराखंड में 10 शोध छात्रों को डा. शिवानंद नौटियाल छात्रवृत्ति प्रदान किए जाने की घोषणा। 

- गढ़वाल विवि में डा. शिवानंद नौटियाल के साहित्य को संरक्षित किए जाने के लिए कक्ष आवंटन की घोषणा।

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