लोकेशन आलोट जिला ब्यूरो
डॉ सुनील चोपड़ा
आलोट में धड़ल्ले से बिक रही जहर वाली चाय - पेपर कप में 15 मिनट में 25 हजार माइक्रोप्लास्टिक
नगर के कई होटलों व चाय की गुमटियों पर अब भी चाय पॉलिथीन की थैली और डिस्पोजल पेपर कप में परोसी जा रही है, जो सेहत के लिए बेहद हानिकारक है। आईटीआई खड़गपुर की ताजा रिसर्च ने खुलासा किया है कि पेपर कप में गरम चाय-कॉफी पीना अब कैंसर को न्योता देने जैसा है। 15 मिनट में ही कप की अंदरूनी परत से 25 हजार माइक्रोप्लास्टिक कण चाय में घुल जाते हैं।आलोट की होटलों पर जांच का विषय
नगर के बस स्टैंड, मेन रोड, सब्जी मंडी, कॉलेज और तहसील कार्यालय के बाहर सहित पूरे शहर में दर्जनों चाय-टपरी हैं। इनमे 99 प्रतिशत दुकानदार अब सस्ते के चक्कर में डिस्पोजेबल पेपर कप वापरते आ रहे हैं। 5 रुपये की चाय में 50 पैसे का पेपर कप। पर ये 50 पैसे सेहत पर भारी पड़ रहा है।
रिसर्च के अनुसार जो व्यक्ति दिन में 3 कप चाय पीता है, वो रोज 75,000 सूक्ष्म प्लास्टिक कण निगल रहा है। ये कण सिर्फ कैंसर ही नहीं, हार्मोन गड़बड़ी और नर्वस सिस्टम की बीमारी का कारण बन सकते हैं।
डॉक्टर बोले - कुल्हड़/स्टील ही सुरक्षित
प्रभारी ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. देवेंद्र मौर्य ने नागरिकों से अपील की है कि मिट्टी के कुल्हड़, स्टील या कांच के कप का इस्तेमाल करें। पेपर कप को 'साइलेंट पॉइजन' बताया है।
कुल्हड़ वाले कुम्हारों की लौटी उम्मीद
कुछ साल पहले तक आलोट में हर गुमटी पर कांच के गिलास और चीनी के कप में चाय मिलती थी। पेपर कप आने से वो परंपरा गायब हो गई। अब आईटीआई की रिसर्च के बाद फिर से कुल्हड़ की डिमांड बढ़ने की उम्मीद है।
स्थानीय कुम्हार कुणाल प्रजापति बोले, "पेपर कप के चक्कर में हमारा काम बंद हो गया था। पूर्व में हमारे दादाजी के समय कुल्हड बिकते थे अब लोग सेहत की बात कर रहे हैं तो कुल्हड़ फिर बिकेगा। मिट्टी का कप 100 प्रतिशत प्राकृतिक है, नुकसान नहीं करता।
होटल व्यवसायी का कहना है कि पांच रुपए की चाय ग्राहक डिस्पोजल कप में देना सस्ता पडता है लेकिन कुल्हड मे देना बहुत महंगा होगा।
इनका कहना है कि
नगर परिषद द्वारा शीघ्र ही एक अभियान चलाकर होटलों से यह व्यवस्था बंद कराई जाएगी।
सीताराम चौहान
प्रभारी मुख्य नगर पालिका अधिकारी, आलोट ।
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