ग्रांउड रिपोर्ट,TTN24 न्यूज, कोलकाता
भवानीपुर बना सियासी बारूदखाना: पुलिस की सख्ती या सत्ता का दबाव? डर के साये में वोटर अपना फैसला बरकरार रखेगे?
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण से पहले भवानीपुर जहाँ से ममता बैनर्जी की राजनीतिक साख जुड़ी है अब खुलकर सियासी टकराव का केंद्र बन चुका है। ज़मीनी हालात इशारा कर रहे हैं कि यह चुनाव सिर्फ वोट का नहीं, बल्कि वर्चस्व की सीधी लड़ाई बन गया है।पुलिस की सक्रियता या रणनीतिक दबाव? चुनाव आयोग के निर्देश पर कालीघाट और अलीपुर थानों के प्रभारियों का तबादला किया गया, लेकिन विपक्ष इसे सामान्य प्रशासनिक कदम नहीं मान रहा। सवाल उठ रहे हैं कि क्या पुलिस की बढ़ी मौजूदगी निष्पक्षता का संकेत है या मतदाताओं पर मनोवैज्ञानिक दबाव?
सड़क पर उतर आया सियासी संग्राम
भवानीपुर में पोस्टर फाड़ने से लेकर प्रचार सामग्री नष्ट करने तक, टकराव अब खुलकर सड़कों पर दिखाई दे रहा है।
ओल इंडिया तृणमूल कांग्रेसका आरोप है की भाजपा “बाहरी ताकतों” के सहारे माहौल बिगाड़ रही है। ओर बिगड़े माहौलका सीधा फायदे भाजपा लेना चाहती है।
उसी बातको लेकर भारतीय जनता पार्टीका पलटवार—TMC “स्थानीय दबंगई” से वोटरों को खामोश कर रही है। सहीमे ऐसे दबंगईसे चुनाव जंगमें सत्ता हासिल करना स्वतंत्र भारतमें लोकशाहीका गला घोंटना जैसी बातहुई।
डर के साये में लोकतंत्र ग्राउंड रिपोर्ट्स की मानें तो हालात ऐसे हैं कि लोग कैमरे पर बोलने से बच रहे हैं। एक ही वाक्य माहौल की सच्चाई बयां कर रहा है,“मुंह खोला तो रोज़ी-रोटी जाएगी।”
क्यों अहम है भवानीपुर?
भवानीपुर सिर्फ एक सीट नहीं, बल्कि बंगाल की सत्ता का प्रतीक है। यहाँ का परिणाम तय करेगा ममता बैनर्जीकि पकड़ कितनी मजबूत है और भाजपा की चुनौती कितनी गहरी।
