लोकेशन आलोट जिला ब्यूरो
डॉ सुनील चोपड़ा
कृषि आदान व्यापारियों की सांकेतिक हड़ताल, पीएम मोदी के नाम एसडीएम आलोट को सौंपा ज्ञापन; 12 सूत्री मांगों के निराकरण की मांग
आलोट |कृषि आदान विक्रेता संघ आलोट, जिला रतलाम द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम 12 सूत्री मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा गया। एग्रो इनपुट डीलर्स एसोसिएशन (AIDA) के बैनर तले देशभर के करीब 5 लाख खाद, बीज और कीटनाशक व्यापारी 27 अप्रैल को एक दिन की सांकेतिक हड़ताल पर रहे।
ज्ञापन में बताया गया कि पिछले 10 वर्षों से व्यापारी कई समस्याओं का सामना कर रहे हैं। केंद्र और राज्य सरकारों को बार-बार निवेदन के बाद भी निराकरण न होने से यह कदम उठाया गया। *प्रमुख 12 मांगें:*1. *खाद पर जबरन लिंकिंग पर रोक:* सब्सिडी वाले खाद के साथ अनुपयोगी उत्पादों की बिक्री को अपराध घोषित किया जाए।
2. *FOR डिलीवरी:* खाद की डिलीवरी डीलर के बिक्री केंद्र तक हो। अभी रेल-हेड पर मिलने से प्रति बैग 40-50 रुपए अतिरिक्त खर्च आता है।
3. *डीलर मार्जिन 8%:* बढ़ती महंगाई को देखते हुए उर्वरकों पर मार्जिन कम से कम 8% किया जाए।
4. *SATHI पोर्टल:* ग्रामीण खुदरा विक्रेताओं के लिए वैकल्पिक हो, केवल निर्माता और थोक विक्रेता तक अनिवार्य रहे।
5. *HTBT बीज नीति:* अवैध बीजों की बिक्री पर रोक लगे या अधिकृत डीलरों को विनियमित बिक्री की अनुमति मिले।
6. *विक्रेता को ‘साक्षी’ का दर्जा:* सीलबंद पैकिंग में नमूना फेल होने पर विक्रेता को अपराधी न मानकर गवाह माना जाए।
7. *एक्सपायर्ड कीटनाशक:* कंपनियों के लिए पुराना स्टॉक वापस लेना कानूनी रूप से अनिवार्य हो।
8. *कानूनी संशोधन:* नए बीज अधिनियम और कीटनाशक विधेयक 2025 में रिटेल डीलर को ‘प्रथम पक्ष’ बनाने का प्रावधान शिथिल हो।
9. *जांच कमेटी:* झूठी शिकायत पर कार्रवाई से पहले जिला स्तर पर कमेटी जांच करे।
10. *21 दिन में बहाली:* छोटी-मोटी बातों पर लाइसेंस निलंबन के बाद 21 दिन में स्वत: बहाली हो।
11. *PC जोड़ने की अनिवार्यता खत्म:* खाद-बीज का लाइसेंस 5 वर्ष और कीटनाशक का आजीवन है, ऐसे में हर साल प्रिंसिपल सर्टिफिकेट जोड़ना बंद हो।
12. *दोहरी लाइसेंस प्रथा बंद:* अनाज और उद्यानिकी बीजों के लिए अलग-अलग लाइसेंस की प्रथा समाप्त हो।
संघ ने चेतावनी दी कि एक माह में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो खरीफ सीजन से पहले अनिश्चितकालीन बंद किया जाएगा। इससे कृषि उत्पादन और किसानों पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा, जिसकी जिम्मेदारी सरकारों की होगी।

