फर्रुखाबाद: UGC कानून के विरोध में सड़कों पर उतरा सवर्ण समाज, पीएम के खिलाफ जमकर हुई नारेबाजी; कलेक्ट्रेट पर सौंपा ज्ञापन ।।
रिपोर्ट सौरभ दीक्षित फर्रुखाबाद
फर्रुखाबाद/फतेहगढ़: जनपद के फतेहगढ़ में मंगलवार को सवर्ण समाज ने यूजीसी (UGC) के नए कानून के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने इस कानून को सवर्ण समाज के हितों के खिलाफ बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की। स्वर्गीय ब्रह्मदत्त द्विवेदी स्टेडियम से शुरू हुआ यह विरोध मार्च कलेक्ट्रेट तक पहुंचा, जहां सिटी मजिस्ट्रेट को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया।स्टेडियम से कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च मंगलवार सुबह करीब 10:30 बजे से ही सवर्ण समाज के लोग, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष शामिल थे, स्टेडियम के बाहर जुटना शुरू हो गए थे। 11 बजे तक सैकड़ों की भीड़ ने हाथों में बंडल और तख्तियां लेकर कलेक्ट्रेट की ओर कूच किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने "मोदी तेरी तानाशाही नहीं चलेगी" और "प्रधानमंत्री गद्दी छोड़ो" जैसे नारे लगाए।
मार्च कलेक्ट्रेट गेट पर पहुंचा, जहां प्रदर्शनकारी कुछ देर धरने पर बैठे और बाद में प्रांगण के अंदर जाकर नारेबाजी की। शुरुआत में प्रदर्शनकारी जिलाधिकारी को ज्ञापन देने पर अड़े थे, लेकिन बाद में सिटी मजिस्ट्रेट संजय कुमार बंसल को ज्ञापन सौंपा गया।करणी सेना और ब्रह्म महासभा ने दी चेतावनी इस प्रदर्शन में 'राष्ट्रवादी ब्रह्म महासभा' और 'करणी सेना' के पदाधिकारी भी शामिल रहे। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि "अभी तो यह अंगड़ाई है, आगे बहुत लड़ाई है।" उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों (सांसदों-विधायकों) से भी समर्थन की मांग की और कहा कि अगर वे साथ नहीं आए, तो चुनाव में उनसे सवाल किए जाएंगे।
संविधान के उल्लंघन का आरोप राष्ट्रवादी ब्रह्म महासभा के जिला अध्यक्ष अमन दुबे ने कहा, "13 जनवरी से लागू किया गया यूजीसी का यह नियम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का खुला उल्लंघन है। यह नियम व्यक्तिगत जातिगत भेदभाव की शिकायतों पर आधारित है, जिससे सवर्ण समाज आहत है।"सेवानिवृत्त सेना अधिकारी विजय कुमार शुक्ला ने इसे "काला कानून" करार देते हुए कहा कि यह हिंदूवादी संगठनों को बांटने की साजिश है। उन्होंने बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा दिए गए इस्तीफे का समर्थन किया और कहा कि सवर्ण अधिकारियों को भी ऐसा ही कदम उठाना चाहिए।
झूठे केस में फंसने का डर करणी सेना के जिलाध्यक्ष और शुभ दीक्षित ने चिंता जताई कि इस कानून के तहत सवर्ण समाज के लोगों को झूठे केस में फंसाया जा सकता है। उन्होंने सवाल उठाया, "अगर कोई निर्दोष फंसता है और उसका जीवन बर्बाद होता है, तो उसकी भरपाई कौन करेगा?"
युवा प्रदेश अध्यक्ष विमलेश मिश्रा और विटाना चौहान ने कहा कि सवर्णों ने ही सरकार को वोट दिया था, लेकिन अब यह एक्ट उनके लिए घातक साबित हो रहा है। उन्होंने "हिंदू एकता जिंदाबाद" का नारा देते हुए सरकार से कानून वापस लेने की मांग की।


