आनन्द बॉबी चावला ब्यूरो चीफ झांसी।
रानी लक्ष्मी बाई केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय (आरएलबीसीएयू), झाँसी द्वारा 28 से 30 जनवरी, 2026 तक चौथा भारतीय बागवानी सम्मेलन-सह-अंतराष्ट्रीय सम्मेलन
झाँसी। दिनांक:- 27 जनवरी, 2026
झांसी। रानी लक्ष्मी बाई केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय (आरएलबीसीएयू), झाँसी द्वारा 28 से 30 जनवरी, 2026 तक चौथा भारतीय बागवानी सम्मेलन-सह-अंतराष्ट्रीय सम्मेलन 2026 का आयोजन विश्वविद्यालय परिसर में किया जाएगा। यह तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन 'सतत विकास, स्वास्थ्य एवं आर्थिक सुदृढ़ता हेतु स्वदेशी एवं अल्प-उपयोगिता बागवानी फसलों का उपयोग विषय पर केन्द्रित होगा।यह सम्मेलन भारत में बागवानी क्षेत्र के सतत विकास, पोषण सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन अनुकूलन तथा किसानों की आय वृद्धि के लिए एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय मंच प्रदान करेगा। सम्मेलन का उद्देश्य स्वदेशी एवं अल्प-उपयोगिता बागवानी फसलों के वैज्ञानिक, तकनीकी, आर्थिक और सामाजिक महत्व को रेखांकित करना तथा इनके व्यापक उपयोग के लिए नीति, अनुसंधान एवं उद्यमिता को प्रोत्साहित करना है।
वर्तमान परिदृश्य एवं सम्मेलन की प्रासंगिकता
वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन, कुपोषण, खाद्य एवं पोषण असुरक्षा, प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ता दबाव, घटती कृषि लाभप्रदता तथा किसानों की आय में अस्थिरता जैसे समस्याएँ वैश्विक स्तर पर कृषि क्षेत्र के समक्ष गंभीर चुनौती बनी हुई है। ऐसे में स्वदेशी एवं बागवानी फसलें इन चुनौतियों के समापान के रूप में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकती है।
ये फसलें न केवल सूक्ष्म पोषक तत्वों, विटामिन, एंटीऑक्सीडेंट एवं औषधीय गुणों से भरपुर है, बल्कि स्थानीय जलवायु एवं मृदा परिस्थितियों के अनुकूल होने के कारण कम इनपुट लागत, न्यूनतम जल उपयोग, अधिक सहनशीलता तथा जोखिम-रहित उत्पादन प्रणाली प्रदान करती है। इसके अतिरिक्त, ये फसलें जलवायु-सहिष्णु कृषि, पोषण-संवेदनशील खेती तथा किसानों की आय विविधीकरण में महत्वपूर्ण
भूमिका निभाती है। विशिष्ट अतिथि एवं सहभागिता
इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में
डॉ. पंजाब सिंह; माननीय कुलाधिपति, रानी लक्ष्मी बाई केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झाँसी
डॉ. एस. के. सिंह; उप महानिदेशक (डीडीजी), बागवानी, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली
डॉ. बलराज सिंहः अध्यक्ष, सोसाइटी फॉर हॉर्टिकल्चर रिसर्च एण्ड डेवलपमेंट (एसएचआरडी) एवं पूर्व कुलपति; श्री कर्ण नरेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर
डॉ. टी. जानकीराम; पूर्व कुलपति, डॉ. वाई. एस. आर. बागवानी विश्वविद्याल, आन्ध्र प्रदेश
डॉ. रोजश कुमार; निदेशक, भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणासी
डॉ. शैलेन्द्र राजन; पूर्व निदेशक, केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ
डॉ. पी. एल. सरोज; पूर्व निदेशक, केन्द्रीय शुष्क बागवानी संस्थान, बैंगलोर
डॉ. पी. के. गुप्ता; निदेशक, राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एंव विकास, फाउंडेशन, नई दिल्ली
डॉ. जगदीश राणे; निदेशक, केन्द्रीय शुष्क बागवानी संस्थान, बीकानेर
सहित देश-विदेश के प्रतिष्ठित कृषि एवं बागवानी अनुसंधान संस्थाओं के निदेशक, वरिष्ठ वैज्ञानिक, नीति-निर्माता, प्रशासक तथा विषय विशेषज्ञ भाग लेंगे।
प्रतिभागियों की व्यापक सहभागिता
तीन दिवसीय इस सम्मेलन में भारत एवं विदेशों से वैज्ञानिक, शिक्षाविद्, कृषि विश्वविद्यालयों के शोधार्थी, प्रगतिशील किसान, एफपीओ प्रतिनिधि, उद्यमी, स्टार्ट-अप संस्थापक, कृषि उद्योग से जुड़े विशेषज्ञ,नीति-विशेषज्ञ तथा छात्र सहभागिता करेंगें यह सम्मेलन ज्ञान, नवाचार, अनुभव एवं नीति संवाद के लि एक सशक्त मंच के रूप में कार्य करेगा।
तकनीकी कार्यक्रम एवं सत्र
सम्मेलन के दौरान निम्नलिखित गतिविधियों आयोजित की जाएगी-
उद्घाटन एवं समापन सत्र
अंतर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय मुख्य व्याख्यान
विषय-विशेष तकनीकी सत्र
नीति एवं उद्योग आधारित पैनल चर्चाएँ
पोस्टर एवं मौखिक शोध प्रस्तुतियाँ
किसान-वैज्ञानिक एवं उद्योग-वैज्ञानिक संवाद
स्टार्ट-अप एवं उद्यमिता पर विशेष सत्र
मुख्य विषय क्षेत्र
सम्मेलन में विशेष रूप से निम्मलिखित विषयों पर गहन चर्चा की जाएगी-
स्वदेशी एवं अल्प-उपयोगिता बागवानी फसलों का फसल सुधार एवं जैव विविधता संरक्षण
पारंपरिक एवं आधुनिक प्रजनन तकनीक
जीनोमिक्स, बायोटेक्रोलॉजी एवं जीन संवादन
जलवायु-सहिष्णु एवं संरक्षित बागवानी
सटीक कृषि एवं स्मार्ट टेक्रोलॉजी
गुणवत्तापूर्ण एवं रोग-मुक्त रोपण सामग्री
एकीकृत रोग एवं कीट प्रबंधन
फसलोत्तर प्रबंधन, भंडारण एवं मूल्य संवर्धन
खाद्य प्रसंस्करण, ब्रांडिंग एवं विपणन
बागवानी उत्पादों का निर्यात एवं वैश्विक अवसर
एफपीओ आधारित उद्यमिता, स्टार्ट-अप एवं रोजगार सृजन
पुरस्कार एवं सम्मान
इस अवसर पर सोसाइटी फॉर हॉर्टिकल्चर रिसर्च एण्ड डेवलमेंट (एसएचआरडी) द्वारा बागवानी क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले वैज्ञानिकों, शिक्षकों एंव शोधकर्ताओं को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड, उत्कृष्ट वैज्ञानिक पुरस्कार, युवा वैज्ञानिक पुरस्कार, महिला वैज्ञानिक पुरस्कार, श्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार तथा नेतृत्व उत्कृष्टता पुरस्कार सहित विभिन्न प्रतिष्ठित सम्मानों से अलंकृत किया जाएगा।
सम्मेलन का व्यापक प्रभाव
यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन सतत बागवानी विकास, पोषण सुरक्षा, जलवायु अनुकूल कृषि, नवाचार आधारित उद्यमिता, रोजगार सृजन एवं किसानों की आर्थिक समृद्धि को नई गति प्रदान करेगा। साथ ही, यह सम्मेलन 'विकसित कृषि विकसित भारत @ 2047" के राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगा।
कैमरामैन शिवम् के साथ आनन्द बॉबी चावला।
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