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बोकारो सिविल कोर्ट को मिली बम धमकी: मजाक नहीं, सतर्कता का समय

 लोकेशन बोकारो सिविल कोर्ट से नेशनल ब्यूरो हेड एवं लीगल एडवाइजर अधिवक्ता राजेश कुमार की विशेष रिपोर्ट।

 बोकारो सिविल कोर्ट को मिली बम धमकी: मजाक नहीं, सतर्कता का समय

बोकारो, 9 मार्च 2026  

हाल ही में झारखंड के बोकारो सिविल कोर्ट को एक अज्ञात ईमेल के माध्यम से बम धमकी मिली है, जिसमें कोर्ट परिसर को उड़ाने की धमकी दी गई है। यह घटना न केवल स्थानीय स्तर पर चिंता पैदा कर रही है, बल्कि पूरे देश में कोर्टों को निशाना बनाने वाले सिलसिले का हिस्सा लग रही है। राष्ट्रीय ब्यूरो हेड एवं लीगल एडवाइजर अधिवक्ता राजेश कुमार के अनुसार, यह धमकी किसी "सनकी" तत्व द्वारा भेजी गई प्रतीत होती है, लेकिन इसे हल्के में लेना घातक हो सकता है। "घबराएं नहीं, लेकिन सतर्क रहें," उन्होंने अपनी ब्रेकिंग न्यूज में कहा।

यह पहली घटना नहीं है। हाल के दिनों में भारत के कई कोर्टों को इसी तरह की धमकियां ईमेल के जरिए मिल चुकी हैं। उदाहरण के तौर पर, फरवरी 2026 में झारखंड के धनबाद सिविल कोर्ट को भी एक समान ईमेल प्राप्त हुआ था, जिसमें वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार को संबोधित कर बम प्लांट होने का दावा किया गया। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पूरे परिसर को खाली करा लिया और सघन तलाशी ली, लेकिन कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला। इसी प्रकार, पश्चिम बंगाल के आसनसोल, सूरी और धनबाद कोर्ट्स को भी फरवरी में बम धमकी वाले ईमेल मिले, जिससे न्यायिक कार्य ठप हो गया।

बिहार में भी यह समस्या गंभीर रूप ले चुकी है। जनवरी 2026 में पटना, मुजफ्फरपुर, गया, भागलपुर और पूर्णिया सहित पांच जिलों के कोर्टों को बम धमकी वाले ईमेल प्राप्त हुए, जो बाद में नकली साबित हुए। गुजरात के वडोदरा, वलसाड जैसे छह जिलों के कोर्ट्स फरवरी में इसी तरह प्रभावित हुए जबकि कर्नाटक, ओडिशा, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के कोर्ट्स में भी ऐसी घटनाएं दर्ज की गईं। दिल्ली हाईकोर्ट को फरवरी में मिली धमकी के बाद सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी। ये सभी ईमेल ज्यादातर होक्स (नकली) साबित हुए हैं, लेकिन हर बार न्यायिक प्रक्रिया बाधित होती है, जो लोकतंत्र की नींव को कमजोर करता है।

सवाल उठते हैं: कौन भेज रहा है ये धमकियां?

अधिवक्ता राजेश कुमार ने सवाल उठाया है कि आखिर ये ईमेल किस आईडी से भेजे जा रहे हैं? अधिकांश मामलों में, ईमेल जैसे 'rameeza_hussain@hotmail.com' जैसी साधारण आईडी से आते हैं, जो आसानी से ट्रेस नहीं हो पातीं। पुलिस विभाग और तकनीकी सेल की भूमिका यहां अहम है। साइबर क्राइम यूनिट्स ने कई मामलों में जांच शुरू की है, लेकिन अभी तक कोई ठोस गिरफ्तारी नहीं हुई। उदाहरणस्वरूप, केंद्रीय साइबर क्राइम डिवीजन ने बेंगलुरु सिविल कोर्ट की धमकी पर केस दर्ज किया है,लेकिन स्रोत का पता लगाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। राजेश कुमार ने कहा, "पुलिस और तकनीकी विभाग क्या कर रहे हैं? आईपी ट्रैकिंग, सर्वर लॉग्स और इंटरनेशनल कोऑपरेशन की जरूरत है। अगर ये विदेशी सर्वर से आ रहे हैं, तो INTERPOL की मदद लें।"

वे आगे जोर देकर कहते हैं कि विशेषज्ञों को तैनात कर ईमेल के मेटाडेटा का विश्लेषण किया जाए। "यह मजाक नहीं, बल्कि साइबर टेररिज्म का रूप हो सकता है," उन्होंने चेतावनी दी।

कहावत याद रखें: 'शेर आया, शेर आया...'

एक पुरानी कहावत है – "शेर आया, शेर आया चिल्लाने से लोग भागने लगते हैं, लेकिन शेर तुरंत नहीं आता।" ठीक वैसे ही, ये लगातार धमकियां लोगों को लापरवाह बना सकती हैं। पहले तो सभी घबरा जाते हैं, लेकिन बार-बार होक्स मिलने पर पुलिस और जनता सोचने लगती है कि 'यह तो मजाक है।' कहीं ऐसा न हो कि असली खतरा आ जाए और हम तैयार न हों! बोकारो जैसी घटना के बाद, अगर सतर्कता कम हो गई, तो परिणाम भयावह हो सकते हैं।

राजेश कुमार ने अपील की: "पुलिस को हर धमकी को संदेह की नजर से देखना चाहिए। आम जनता, अधिवक्ता और कोर्ट स्टाफ सबको मिलकर सहयोग करना होगा। सतर्क रहें – ईमेल चेक करें, संदिग्ध गतिविधियां रिपोर्ट करें। तकनीकी रूप से मजबूत सिस्टम बनाएं, जैसे ईमेल फिल्टर्स और अलर्ट सिस्टम।" बिहार और झारखंड पुलिस ने पहले ही एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) गठित की है,लेकिन इसे और मजबूत करने की जरूरत है।

आगे की राह: सामूहिक जिम्मेदारी

ये धमकियां न केवल कोर्टों को, बल्कि पूरे न्याय व्यवस्था को चुनौती दे रही हैं। सरकार को साइबर सिक्योरिटी पर निवेश बढ़ाना चाहिए, जबकि नागरिकों को जागरूक रहना होगा। अधिवक्ता राजेश कुमार ने कहा, "यह समय एकजुट होने का है। लापरवाही से बचें, सहयोग से जीतें।"

बोकारो पुलिस ने धमकी की जांच शुरू कर दी है, और उम्मीद है कि जल्द ही अपराधी का पता लगेगा। तब तक, सतर्कता ही हमारा सबसे बड़ा हथियार है।

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