गणतंत्र दिवस के अवसर पर बोकारो में जेलों में विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा आयोजित विशेष मेडिकल कैंप एवं जेल अदालत की रिपोर्ट
बोकारो से विशेष रिपोर्ट – अधिवक्ता राजेश कुमार, नेशनल हेड एवं लीगल एडवाइजर
रांची, 27 जनवरी 2026: भारतीय संविधान के गणतंत्र मूल्यों को साकार करने और बंदियों के अधिकारों तथा स्वास्थ्य की रक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (JHALSA), रांची के निर्देशानुसार बोकारो जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) ने एक सराहनीय पहल की। गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 2026 (सोमवार) को मंडल कारागार, चास एवं अनुमंडलीय कारागार, तेनुघाट में मेडिकल कैंप सह-जेल अदालत का सफल आयोजन किया गया।इस कार्यक्रम का संचालन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, बोकारो, श्री अनिल कुमार मिश्रा के कुशल मार्गदर्शन में हुआ। झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप यह आयोजन बंदियों को त्वरित न्याय, स्वास्थ्य सुविधा और विधिक जागरूकता प्रदान करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया।
जेल अदालतों का गठन एवं कार्यवाही
मंडल कारागार, चास के लिए गठित बेंच में श्री मनोरंजन कुमार नंबर-1, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी, बोकारो एवं श्रीमती पम्मी कुमारी, LADCS सदस्य शामिल थे।
अनुमंडलीय कारागार, तेनुघाट के लिए बेंच में श्री मनोज कुमार प्रजापति, अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी, तेनुघाट एवं श्री गिरिवर कुमार महतो, रिटेनर अधिवक्ता सदस्य उपस्थित रहे।
मंडल कारागार, चास में स्थापित जेल अदालत में एक महत्वपूर्ण मामले का निष्पादन हुआ। जी.आर. केस नंबर 700/2018 में अभियुक्त शंभू धीवर (पिता स्वर्गीय कुथारा धीवर) ने अपने दोष स्वीकृति के आधार पर रिहाई का अनुरोध किया, जिस पर बेंच द्वारा कारागार से मुक्त करने का आदेश पारित किया गया। यह निर्णय बंदियों के अधिकारों की रक्षा और न्यायिक प्रक्रिया में त्वरित निपटारे का एक सकारात्मक उदाहरण है।मेडिकल कैंप एवं स्वास्थ्य जांच
मेडिकल कैंप में कुल 76 बंदियों की स्वास्थ्य जांच की गई। यह जांच बंदियों के शारीरिक स्वास्थ्य की निगरानी, आवश्यक दवाइयों का वितरण एवं चिकित्सकीय सलाह प्रदान करने के लिए आयोजित की गई थी। इस कैंप से बंदियों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई, जो उनके मानवाधिकारों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण कदम है।
उपस्थित पदाधिकारी एवं जागरूकता अभियान
कार्यक्रम में श्री अरुण कुमार दुबे, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, बोकारो के साथ-साथ जेल प्रशासन के पदाधिकारी श्री निखिल कांत एवं श्री अमृत मुण्डा, श्रीमती पम्मी झा (सदस्य LADCS) तथा श्री सुखदेव शर्मा (पीएलवी, बोकारो) उपस्थित रहे।
जेल अदालत के दौरान पदाधिकारियों ने बंदियों को उनके संवैधानिक एवं विधिक अधिकारों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्हें मुफ्त विधिक सहायता, जमानत के प्रावधान, अपील के अधिकार तथा अन्य सुविधाओं के प्रति जागरूक किया गया। यह जागरूकता अभियान बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उनके पुनर्वास में सहायक सिद्ध होगा।
महत्वपूर्ण संदेश
जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव श्री अरुण कुमार दुबे ने बताया कि ऐसे आयोजन बंदियों के अधिकारों की रक्षा, उनके स्वास्थ्य की देखभाल और न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए नियमित रूप से किए जाते हैं। गणतंत्र दिवस जैसे अवसर पर यह पहल संविधान के मूल्यों—न्याय, समानता और गरिमा—को जेलों के भीतर भी जीवंत करने का प्रयास है।
झारखंड विधिक सेवा प्राधिकार एवं बोकारो DLSA की यह पहल न केवल बंदियों के लिए राहत प्रदान करती है, बल्कि समाज में न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास भी मजबूत करती है। भविष्य में भी ऐसे कैंप एवं जेल अदालतों का आयोजन जारी रहेगा ताकि कोई भी व्यक्ति न्याय से वंचित न रहे।

