चैनल के डिगा एडवाइजर एवं नेशनल ब्यूरो हेड अधिवक्ता राजेश कुमार के कलम से।
🚨 “बोकारो एयरपोर्ट का सपना या दुर्घटना का न्योता?”
सड़क पर सब्जी मंडी, गंदगी और जाम के बीच क्या उड़ान भर पाएगा बोकारो?
आई मुस्कुराइए, आप बोकारो में हैं…!जहाँ एक तरफ बोकारो एयरपोर्ट शुरू होने के सपने दिखाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ शहर की सड़कें बदहाली, अतिक्रमण और अव्यवस्था की कहानी बयां कर रही हैं। सवाल यह है कि क्या केवल चारदीवारी खड़ी कर देने से एयरपोर्ट चालू हो जाएगा? क्या प्रशासन ने कभी उस रास्ते की सच्चाई देखी है जहाँ से होकर लोग एयरपोर्ट तक पहुँचेंगे?
आज बोकारो के जिलाधिकारी और बीएसएल प्रबंधन एयरपोर्ट को लेकर लगातार बैठकें कर रहे हैं। मापी, सर्वे, एनओसी और सर्टिफिकेट की बातें हो रही हैं। लेकिन शायद अभी तक वह जरूरी सर्टिफिकेट नहीं मिल पाया है जिससे बोकारो एयरपोर्ट का रास्ता पूरी तरह साफ हो सके। और सच पूछा जाए तो वर्तमान हालात देखकर लगता है कि मिलना भी नहीं चाहिए — क्योंकि जमीनी हकीकत कुछ और ही बयान करती है।जरा हटिया मोड़ से सेक्टर-12 तक की सड़क पर शाम के समय निकलकर देखिए। जिस रास्ते को पार करने में महज 2 मिनट लगने चाहिए, वहाँ आम लोगों को आधा घंटा तक जाम में फंसना पड़ता है। कारण क्या है? सड़क के दोनों किनारों पर फैली सब्जी मंडी, सड़क पर खड़े ठेले, बीच डिवाइडर तक पर कब्जा, और चारों तरफ फैली गंदगी।
स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि सड़क पर चलना तक मुश्किल हो गया है। दुर्घटना की आशंका हर समय बनी रहती है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि यह सब कुछ प्रशासन और बीएसएल प्रबंधन की आंखों के सामने हो रहा है। बीएसएल के होमगार्ड तैनात रहते हैं, अधिकारी रोज गुजरते हैं, लेकिन कार्रवाई शून्य है।सवाल यह है कि आखिर यह दोहरा मापदंड क्यों?गरीबों के घर तोड़ने के लिए बुलडोजर तुरंत चल पड़ता है, लेकिन सड़क किनारे फैली अवैध सब्जी मंडी प्रशासन को दिखाई नहीं देती। क्या नियम सिर्फ कमजोर लोगों के लिए हैं? क्या शहर की यातायात व्यवस्था और आम जनता की सुरक्षा की कोई कीमत नहीं?
और सबसे बड़ा सवाल — अगर यही हाल रहा तो क्या बोकारो एयरपोर्ट सुरक्षित माना जा सकता है?
सड़क किनारे फैली गंदगी, खुले में फेंके गए कचरे और सब्जी मंडी के कारण बड़ी संख्या में कौवे और अन्य पक्षी मंडराते दिखाई देते हैं। विमानन नियमों के अनुसार एयरपोर्ट के आसपास पक्षियों की अधिक मौजूदगी बेहद खतरनाक मानी जाती है। इससे “बर्ड हिट” जैसी दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। क्या बीएसएल और जिला प्रशासन ने इस पहलू पर कभी गंभीरता से विचार किया है?
क्या बोकारो एयरपोर्ट भविष्य में दुर्घटना का केंद्र बन जाएगा?अगर प्रशासन अभी से सड़क किनारे अतिक्रमण हटाने, यातायात सुधारने और साफ-सफाई की ठोस व्यवस्था नहीं करता, तो बोकारोवासियों का एयरपोर्ट सपना सिर्फ सपना बनकर रह जाएगा।
बोकारो की जनता जवाब मांग रही है —
क्या बीएसएल प्रबंधन इस अव्यवस्था पर चुप रहेगा?
क्या बोकारो जिलाधिकारी इस समस्या को नजरअंदाज करते रहेंगे?
क्या आम लोगों की परेशानी किसी बैठक और फाइल से ज्यादा मायने नहीं रखती?
अब समय आ गया है कि केवल एयरपोर्ट के सपने दिखाने के बजाय शहर की जमीनी व्यवस्था को सुधारा जाए। क्योंकि चमकदार घोषणाओं से नहीं, बल्कि साफ सड़क, बेहतर ट्रैफिक व्यवस्था और जिम्मेदार प्रशासन से ही किसी शहर का भविष्य तय होता है।
— चैनल के लीगल एडवाइजर
अधिवक्ता राजेश कुमार की कलम से



