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बारडोली गुजरात: जवाहरलाल नेहरूजी का कार्यकाल रिकॉर्ड तोड़कर मोदी भारत देशमे लंबे समय शासन करने वाले प्रथम प्रधानमंत्री बनने के अवसर पर गुजरातमे जगह जगह उत्सव मनाया

 ब्यूरोचीफ, शैलेन्द्रसिंह बारडोली गुजरात 


जवाहरलाल नेहरूजी का कार्यकाल रिकॉर्ड तोड़कर मोदी भारत देशमे लंबे समय शासन करने वाले प्रथम प्रधानमंत्री बनने के अवसर पर गुजरातमे जगह जगह उत्सव मनाया।

पीएम नरेंद्र मोदीने देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल के रिकॉर्ड को तोड़ कर लगातार 4,3,99 दिन पीएम रहने का उन्होंने रिकॉर्ड बनाया।


    पीएम का कार्यकाल लोकतंत्र की जागरूकता और जनादेश की विश्वसनीयता का हाल बताता है. हर लीडर की अपनी डेस्टिनी और डिटरमिनेशन होता है. हर काल परिस्थितियों की जरूरत और मजबूरी अलग होती है. हर पीएम रिसोर्सेस और कमिटमेंट के अंदर अचीवमेंट हासिल करता है।


     वैसे तो कभी दो प्रधानमंत्रियों के काम की तुलना औचित्यपूर्ण नहीं होती. लेकिन पंडित नेहरू की खूबियों और कमजोरियों की चर्चा अक्सर राजनीतिक क्षेत्र और संसद में इसलिए होती है, क्योंकि पंडित नेहरू की विरासत प्रधानमंत्री की रही है. उनकी बेटी इंदिरा गांधी और उनके बेटे राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री रहे हैं. अभी भी लांगेस्ट पीएम रहने का रिकॉर्ड इंदिरा गांधी के नाम दर्ज है. देश में दो ही राष्ट्रीय दल हैं, जिनके गठबंधन मुकाबले में खड़े हैं।


    पीएम नरेंद्र मोदी का एनडीए पावर में है, तो राहुल गांधी का इंडिया गठबंधन उनको टक्कर दे रहा है. यह गठबंधन नेहरू की नीतियों को अपनी विरासत मानता है. मोदी का प्रधानमंत्री बनना देश में राजनीति का बहुत बड़ा शिफ्ट था।


    पंडित नेहरू आजादी के बाद पीएम मनोनीत किए गए थे, जबकि पीएम मोदी पीएम उम्मीदवार के रूप में चुनाव में उतरे और जनादेश के बाद पीएम बने. पीएम बनकर जनादेश लेना अलग बात है. पीएम उम्मीदवार के रूप में जनादेश हासिल करना नेता की विश्वसनीयता और लोकतांत्रिक ताकत को दिखाता है. आजादी के समय भारत की स्थिति और वर्तमान हालात में जमीन आसमान का अंतर है।

    जनसंख्या कई गुना बढ़ गई है. वोटर भी उसी हिसाब से बढ़े हैं. शिक्षा बढ़ी है, तो विकास के नए आयाम भी बने. विकास का सारा दारोमदार जनसंख्या पर निर्भर करता है. जिस तरह से देश की जनसंख्या बढ़ी है, उससे विकास के सारे पैमाने हम पढ़ते जा रहे हैं. पहले उतना मीडिया नहीं था. सरकारों और प्रधानमंत्री को मीडिया की कसौटी पर उतनी चुनौती नहीं थी. आजकल तो सोशल मीडिया भी प्रधानमंत्री की कार्यप्रणाली और उनकी नीतियों कार्यक्रमों की ऑडिटिंग में 24 घंटे लगा रहता है।

  राष्ट्रीय परिदृश्य पर पीएम नरेंद्र मोदी के उभरने के बाद देश में जो राजनीतिक शिफ्ट हुआ था, वह लगातार आगे बढ़ता जा रहा है. 2014 में बीजेपी की छ: राज्यों में सरकारें थीं. अब 22 राज्यों में बीजेपी सरकार बनाने में सफल रही है. आलोचना किसी की भी हो सकती है, लेकिन कोई लीडर अगर अपनी विश्वसनीयता और विजन को आगे बढ़ाने में लगातार सफल हो रहा है, तो फिर विरोधियों को भी उसके पॉजिटिव पक्ष को समझने की जरूरत है. विश्व व्यापी परिस्थितियों में जिस तरह के चैलेंज देश के सामने लगातार आ रहे हैं, उनसे हमें निपटना किसी के लिए भी आसान नहीं है।

 

    आलोचना की कसौटी पर भी नरेंद्र मोदी ने रिकॉर्ड स्थापित किया है. गुजरात के सीएम से लेकर अब तक उनकी जितनी आलोचना और निंदा की गई है उतनी शायद पहले के किसी पीएम नहीं की गई होगी. भारत में प्रधानमंत्रियों का इतिहास ऐसा रहा है, उसमें लंबा पीरियड एक ही परिवार के नेताओं के प्रधानमंत्री बने रहने का है।

     पीएम मोदी का कार्यकाल देश की व्यवस्था की शिफ्ट के कार्यकाल के रूप में देखा जाएगा. पीएम नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की गरिमा को नया बढ़ाया है. इसके पहले नेहरू, गांधी परिवार के प्रधानमंत्री को छोड़कर किसी भी प्रधानमंत्री को कोई विशेष प्रतिष्ठा नहीं हासिल हुई. यहां तक कि केवल पंडित जवाहरलाल नेहरु की स्मृतियों को समर्पित नेहरु मेमोरियल संग्रहालय ही स्थापित किया गया था. पीएम मोदी ने उसे पीएम संग्रहालय की पहचान दी है. अब इस संग्रहालय में देश के सभी प्रधानमंत्रियों की सेवाओं और स्मृतियों को संजोया गया है। 

आज भारत का लोकतंत्र अधिक सक्रिय और मुखर हो गया है. इस मुखरता की कसौटी पर भी पीएम मोदी मोदी का काम बहुमत को पसंद है. बहुमत का नायक ही लोकतंत्र का नायक होता है. मोदी के कार्यकाल की उपलब्धियां और रणनीतियों का तात्कालिक आंकलन उतना महत्वपूर्ण नहीं है, जितना इसका दीर्घकालिक प्रभाव कश्मीर से धारा 370 हटी है, तो इसका राष्ट्रीय महत्व लंबे समय बाद दिखाई पड़ेगा।



   महिला आरक्षण के राजनीतिक शिफ्ट से संसद और विधानसभाओं का गणित और भूगोल बदलने वाला है. एक तिहाई महिलाएं अब दोनों सदनों में दिखेंगी. इसमें बहुत लंबा समय नहीं है. जब लोकसभा में महिला रिजर्वेशन और डीलिमिटेशन का बिल गिरा था, तब पीएम मोदी ने कहा था, कि हम लोकसभा में हारें हैं, लेकिन हिम्मत नहीं हारी हैं. जो राजनीतिक समीकरण बनते दिखाई पड़ रहे हैं, उसका यही संकेत है, कि शायद वह हिम्मत एक बार फिर पीएम मोदी दिखाएंगे और इसी लोकसभा में यह बिल फिर से आएगा पारित होगा और अगले लोकसभा चुनाव के पहले महिला रिजर्वेशन डीलिमिटेशन के साथ लागू हो जाएगा।


प्रचारक के रूप में पीएम मोदी का अनुभव उनकी सोच, चिंतन और धैर्य उनकी शासन प्रणाली में दिखता है. विपरीत परिस्थितियों में भी ना वह झुकते हैं और ना ही आलोचनाओं से विचलित होते हैं. भारत में कुछ लोग आरएसएस की विचारधारा के ही विरोधी हैं. उनकी नीति कार्यक्रम भले ही सबके लिए हों, लेकिन विरोध तो विचारधारा के नाम पर ही विरोधियों में समाया हुआ है।


   पार्टी और जनादेश का विश्वास हासिल करने में मोदी का कोई मुकाबला नहीं हो सकता. पहले प्रधानमंत्री के कार्यकाल का रिकॉर्ड पीएम नरेंद्र मोदी ने तोड़ दिया है, तो यह सक्रिय फलते- फूलते लोकतंत्र का उदाहरण है. कई रिकॉर्ड मोदी के नाम बने हैं. दुनिया के देशों में उन्हें मिलने वाला नागरिक सम्मान का भी रिकॉर्ड है।


    सारे रिकॉर्ड जनता के जनता द्वारा और जनता के लिए हैं. देश ऐसे महत्वपूर्ण नेतृत्व निखारता रहे, जो रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड बनाते रहें, यही लोकतंत्र की खूबी और मजबूती है।

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