मनुष्य जन्म करोड़ों में एक को मिलता है: आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज
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"सादर जय सियाराम"
"दुर्लभं त्रयमेवैत् देवानुग्रहकारणात् ।
मनुष्यत्वं मुमुक्षुत्वं महापुरुषसंश्रय: ।।"
श्रीमद्भागवत 11.9.29
तीन चीज दुर्लभ है ।
पहला मनुष्य जन्म दुर्लभ है , दुसरा मोक्ष की इच्छा दुर्लभ है , मोक्ष की आग लग जाना और तीसरा महापुरुषों का संग दुर्लभ है ।
बिना मांगे भगवान का हाथ थाम जाना , जन्म तो 84 लाख योनियों को मिलता है ।
पर मनुष्य जन्म करोड़ों में एक को मिलता है ।
मोक्ष की बात तो मंदिर में होती है ।
पर मोक्ष की प्यास लाखों में एक को लगती है ।
तीनों दुर्लभ हैं ।
हीरा खदान में मिलता है , संत धरती पर मिलते हैं ।
दोनों दुर्लभ हैं ।
दोनों को पहचान वाला ही पाता है ।
और अगर आप लोगों के भी जीवन में संत-सज्जन आ जाए तो समझ लेना कि भगवान ने आपका हाथ पकड़कर लिया है ।
[आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज]
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