ब्यूरोचीफ शैलेन्द्रसिंह बारडोली गुजरात
आज चतुर्थ महासंयोग: एक दिन में चार पर्व का अद्भुत मिलन महाराष्ट्र राज्यमें आज आनंद उल्लास के साथ मनाएंगे वट सावित्रीका अवसर।
शनिश्चरी अमावस्या, शनि जयंती, वट सावित्री और ज्येष्ठ अमावस्या का चतुर्थ संयोग।
आज का दिन धार्मिक दृष्टि से किसी महोत्सव से कम नहीं है। शनिवार, 16 मई 2026 को ज्येष्ठ माह की अमावस्या का संयोग शनिवार के दिन पड़ने से यह शनिश्चरी अमावस्या बन गई है। इसी दिन *शनि जयंती और वट सावित्री व्रतभी हैं यानी एक ही तिथि पर चार पर्वों का दुर्लभ महासंयोग।ज्योतिषाचार्यों के अनुसार ऐसा योग वर्षों में एक बार ही आता है और इस बार गजकेसरी व बुधादित्य राजयोग भी इसी दिन बन रहे हैं, जो इसकी आध्यात्मिक शक्ति को और कई गुना बढ़ा देते हैं।
आजके दिन का तिथि और मुहूर्त
पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या तिथि आज सुबह *05 बजकर 11 मिनट* पर प्रारंभ हुई है और कल 17 मई को रात *01 बजकर 30 मिनट* पर समाप्त होगी। वट सावित्री पूजा का सर्वोत्तम मुहूर्त *सुबह 07:12 से 08:24 बजे* तक रहेगा।
वट सावित्री व्रत सुहागिनों का महाव्रत हिंदू परंपरा में वट सावित्री व्रत को सुहागिन महिलाओं के लिए करवा चौथ जितना ही पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना लेकर बरगद के वृक्ष की पूजा करती हैं और उसके चारों ओर कच्चा सूत लपेटकर परिक्रमा करती हैं।
बरगद का वृक्ष अखंड सौभाग्य, वैवाहिक स्थिरता और दीर्घ दांपत्य जीवन का प्रतीक माना गया है। पौराणिक कथा के अनुसार इसी दिन पतिव्रता सावित्री ने अपने तप और संकल्प के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस लिए थे।
शनि जयंती न्याय के देवता का जन्मदिन ज्येष्ठ अमावस्या को ही शनिदेव का जन्मदिन मनाया जाता है। शनिदेव को कर्मों का न्यायाधीश और न्याय का देवता माना गया है। इस दिन उनकी पूजा, व्रत और दान का विशेष फल बताया गया है। मान्यता है कि आज किए गए सत्कर्म शनि दोष और पितृ दोष दोनों को शांत करते हैं।
आजके दिन चतुर्थ संयोग पर ये कार्य करने का विशेष फलप्राप्त होता है।
- संध्याकाल में शनिदेव को सरसों के तेल का दीपक अर्पित करें
- *काले तिल का दान करें
- बरगद के वृक्ष की पूजा कर *कच्चा सूत लपेटें
- पितरों के लिए तर्पण और जलदान करें
- मौन व्रत और ध्यान साधना का कईगुना विशेष लाभ मिलेगा
कल 17 मई से नया बदलाव दोपहर 3 बजकर 49 मिनट पर शनि ग्रह रेवती नक्षत्रमें गोचर करेंगे। ज्योतिष के जानकारों का कहना है कि यह परिवर्तन कई राशियों के लिए नई सफलता और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आएगा। ओर कई राशियों के लिए सावधानी बरतनी होगी।
