ब्यूरोचीफ शैलेन्द्रसिंह बारडोली गुजरात
अर्थव्यवस्था का अमृतकाल या आम आदमी का संकटकाल ? सोनकी चिड़िया से जानेजाता भारत देश की दुर्दशा: जनता बेहाल ओर चौकीदार विदेशी दौरेमे मस्त।
निर्मला सीतारमण जी ने कहा बाहर खाना कम खाओ, खर्चे घटाओ। ऐसी सूफ़ी सलाह देने से पहले भारतमें विदेशी छोड़ो स्वदेशी अपनाने की जिद्द करने वाले प्रधानमंत्री विदेशी शराब नहीं पीओ ये क्यू नहीं मुहसे बोलते पुरे देशका ठेका चुनिंदा लोगों को देकर घने जंगलों को आज मैदान बनादिया ये देशकी 140 करोड़ जनताकी आंखोंमे धुल झोंकने का काम नरेंद्र मोदीने किया।
पेट्रोल डीजल बचाने की सलाह देने वाले प्रधान मंत्री विदेशों में जाकर सीन सपाटा करनेसे अच्छा दशमे ही रहकर महंगाई का माहोलमें बेसहारा बनी जनता का पापी पेटके बारेम सोचो तो भी जनताकी सच्ची सेवा कहलाएगी।
देश की अर्थव्यवस्था अब रिजर्व बैंक नहीं, सीधे भारतीय गृहिणियों के बजट पर टिकी हुई है। ऐसा लगने लगा है कि दिल्ली में बैठी सरकार आर्थिक नीतियाँ नहीं चला रही, बल्कि हर घर में राशन बचाने का प्रशिक्षण शिविर चला रही है।
उधर टीवी पर राष्ट्रवाद का बैकग्राउंड म्यूजिक बजता रहा। एंकर चीखते रहे “भारत दुनिया की सबसे तेज़ बढ़ती अर्थव्यवस्था है।” आईटी सेल सोशल मीडिया पर ग्राफ बनाकर बताता रहा कि भारत विश्व गुरु बनने की तरफ दौड़ रहा है। लेकिन मोहल्ले का बेरोजगार युवक पूछता रहा “भैया, दौड़ कौन रहा है ? हमें तो नौकरी ही नहीं मिल रही।”देश में अजीब दौर चल रहा है। सरकार कहती है अर्थव्यवस्था मजबूत है, लेकिन जनता का पर्स कमजोर होता जा रहा है। सरकार कहती है विकास हो रहा है, लेकिन आदमी हर महीने अपने खर्च काट रहा है। सरकार कहती है अमृतकाल है, लेकिन आम आदमी की हालत देखकर लगता है जैसे वह किसी आर्थिक वनवास में जी रहा हो।
अब खबरें धीरे-धीरे बाहर आ रही हैं। रुपया गिरता गया। महंगाई बढ़ती गई। उद्योगपति विदेशों में निवेश करने लगे। लेकिन देश को बताया गया कि सब कुछ शानदार है। ऐसा माहौल बनाया गया जैसे भारत की अर्थव्यवस्था अब अमेरिका और चीन को पीछे छोड़ने ही वाली हो।
हररोज जनता के सरपर महंगाई का नया बॉम्ब फूटता है जीवन जरूरी चीजों भारत देशकी जनताको सस्ता गेस सिलेंडरों, पेट्रोल, डीजल, बिजली, अन्न, सब्जी जैसी चीज़ोकी आवश्यकता है लेकिन वर्तमानमे कीखरीदने के लिए असमर्थ बनचुकी है।


