संतों को भी चिंता है लेकिन संतों सामान्य चिंता नहीं है: आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज
🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏🌹🌹"सादर जय सियाराम"
संत वह है जो परहित के लिए जिता है ।
संतों को अपनी चिंता नहीं होती संत दूसरे के लिए जिता है ,संतों सबकी चिंता होती है ।
संतों को भी चिंता है लेकिन संतों सामान्य चिंता नहीं है ।
संतों की चिंता श्रेष्ठ चिंता है क्योंकि उसमें स्वार्थ निहित नहीं है ।
वह स्वार्थ से ऊपर उठकर है ।
सबसे श्रेष्ठ संबंध है गुरु शिष्य का अगर गुरुदेव प्रसन्न हो जाय तो सब कुछ दें देते हैं ।
"प्रयच्छति" जो कुछ जप तप पूजा नेम से प्राप्त नहीं किया जा सकता है ।
उसे सब कुछ भी गुरुदेव की प्रसन्नता से प्राप्त किया जा सकता है ।
गुरुदेव की प्रसन्नता से सब मिलाकर रहता है ।
मिल जाता है ।
भगवतप्राप्ति का सबसे बड़ा उपाय अपना कल्याण करने का सबसे बड़ा उपाय कुछ कर पांवों या ना कर पांवों केवल व केवल गुरुदेव को प्रसन्न कर लो गुरुदेव कैसे प्रसन्न होंगे गुरुदेव के अनुकूल अपना जीवन बना लों गुरुदेव प्रसन्न हो जायेंगे गुरुदेव के अनुकूल अगर शिष्य हो जाय तो (बैकुंठं योगि दुर्लभं) सत्य: साधु सामागम:
जो चीज योगियों को दुर्लभ है वह भी प्राप्त हो जाता है ।
आपका मार्गदर्शक आपके पूज्य गुरुदेव ,
[आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज]
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