ब्यूरोचीफ शैलेन्द्रसिंह बारडोली गुजरात
बारडोली-व्यारा राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित किकवाड गांव में एक अज्ञात वाहन की टक्कर से तेंदुए की मौत हो गई।
बारडोली व्यारा राजमार्ग पर जंगली जानवरों की सुरक्षा के लिए एक नोटिस बोर्ड की तत्काल आवश्यकता है।आज सूरत जिले के बारदोली तालुका के नवी किकवाड़ गांव के पास राष्ट्रीय राजमार्ग पर सड़क पार करते समय एक तेंदुए को एक अज्ञात वाहन चालक ने टक्कर मार दी, जिसके परिणामस्वरूप गंभीर रूप से घायल तेंदुए की मौत हो गई।
आज सुबह, गांव की चहल-पहल में एक व्यक्तिने मृत हालातमे तेंदुआ को हेतल बेन पटेल के खेत के पास पड़ाहुआ दिखाई पड़ा।
भटलाव गांव के जिग्नेशभाई राठौड़ ने तेंदुआ सड़क के किनारे मृत हालातमे पड़ा हुआ देखकर उन्होंने इसकी सूचना बारडोली स्थित फ्रेंड्स ऑफ एनिमल्स वेलफेयर ट्रस्ट के अध्यक्ष जतिन राठौड़ को दी।उस घटनाकी तेनगांव स्थित फॉरेस्ट्री रेंज कार्यालय के आर.एफ.ओ शैलेश भाई पटेल को सूचित किया।
सूचना मिलने पर, वन विभाग के अफसर ओर रेंज कर्मी मौके पर पहुंचे और मृत तेंदुए को अपने कब्जे में लिया।
बारडोली स्थित सामाजिक वनीकरण रेंज कार्यालय मृतदेह ले जायागया, जहां डॉक्टरों के समुह पैनल द्वारा मृत तेंदुए का पोस्टमार्टम किया गया और उच्च अधिकारी के निर्देशानुसार उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
दुर्घटना में तेंदुए की मौत के बारे में जानकारी देते हुए, फ्रेंड्स ऑफ एनिमल्स समूह के अध्यक्ष जतिन राठौड़ ने बताया कि अज्ञात वाहन की चपेट में आया स्वस्थ नर तेंदुआ लगभग छह साल का था। दुर्घटना में मरने वाला तेंदुआ सड़क पार करने के लिए तेजी से दौड़ रहा होगा, तभी राजमार्ग पर तेज रफ्तार से आ रहे एक भारी वाहन ने उसे अचानक टक्कर मार दी।
उन्होंने बताया कि वह बारदोलीके आसपास के इलाकों, खासकर केदारेश्वर मंदिर के पास मिंढोला कंठा क्षेत्र और नवसारी रोड पर ताजपुर गोजि गांव के आसपास के झाड़ीदार इलाकों में ज्यादातर निवास बनाते है इसलिए की उसे ग्रामीण क्षेत्रों में आसानी से शिकार मिल जाता था।
आसपास के इलाकों में घने जंगलों की कटाई के कारण, वन्य प्राणी आवासीय क्षेत्रों में घुसने की घटनाएं अक्सर बढ़ती रही हैं। हालांकि, सरकार ने वन विभाग के किसी भी अधिकारी को वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस योजना बनाने के लिए सूचित सरकारकों नहीं किया है।
इसी वजह से, बारदोली-व्यारा राजमार्ग पर पहले भी कई बार दुर्घटनाओं में तेंदुओं की मौत हो चुकी है, लेकिन आज की घटना से ऐसा लगता है कि सरकार भी वन्यजीवों के जीवन के महत्व को लेकर लापरवाह बरत रहे है।

