ब्यूरोचीफ शैलेन्द्रसिंह बारडोली गुजरात
गुजरात मे कल मतदाताओं सही नेताओ को चुनने मतो का दान करेगी वो किया दान का फल कितना किसका किस्मत चमकाएंगे वो 28 को उस इंतजार का पड़डा हटेगा।
जनताका सवाल गुनेहगार का जुलुश निकालनेसे पीड़िता को न्याय मिल जाएगा?? महिला सुरक्षाकी मंचपरसे बात करने वाले गुजरातके मुख्यमंत्री आपकी राजसत्ता और आपके ही पाटीदार समाजकी नाबालिग छात्रा पर दुष्कर्मकी कोशिश की शर्मशार घटना बाद सुरतका अलथान पुलिसथाने को जानताने घेरलिया उसीदृश्य आपके शासनकाल मे महिलाओ सुरक्षित कितनी उसका पता चलता है।गुजरतमे जनाक्रोश के बीच मतदान प्रकिया कल पुरी होगी उम्मीदवारों का भविष्य मतदाताओं ईवीएम मशीनमें कैदहोगी जनता किसको घरका रास्ता दिखाएगी वो 28 को विकाश नामपर मतोंकी भिक्षा मांगने वालोंके सामने हर तरफ फैला आक्रोश वास्तविक मतदान करके हिसाब पुरा करेगी।
लोक आस्थाके हिन्दू देवी देवताओं परभी राजकीय खेल पुरे गुजरातमे शहरो के चुनावी प्रचार के लिए भाजपा के नेता कार्यकर्ताओं को प्रवेशपर पाबंदी लगाई तो अन्यों राजकीय पार्टीके उम्मीदवारों को अगवा करके भाजपा अपनी पार्टीके शपथ जबरन दिलाने की कोशिश ये कौनसा लोकतंत्र का संविधान।
गुजरातमें अभी चुनावी माहौल मे कोई भी शहरहो या गांव हर जगह पुरा भाजपाके खिलाफ जनाक्रोश फैलाहै दूसरी ओर संविधान के पालन करवाने वाले कानून के रखवाले पुलिस आज राजकीय दलकी कठपुतली बनचुकी आम निर्दोष जनता दंडित हो रही है।
भाजपा पार्टीके खिलाफ सच्चा आवाज उठाने वालोंको दंडित किया जाताहै ओर असामाजिक तत्वोंका लोगोके सामने खुली गुंडागर्दी का आतंक निर्दोष जनता कबतक ये गुलामी झेल पाएगी।
आज आंखों देखी वास्तविक माहौल एक राजकीय सत्ता हांसील करने कोईभी हदतक भयका माहौल बनाना लोकतंत्रकी स्वतंत्रता का खुल्लेआम हनन हो रहाहै ओर जनताकी सुरक्षा व्यवस्था संभालने वाला पुलिस राजकीय पक्षके इशारों पर आज निर्दोष जनता को दंडित कररहे है।
तबतक चुनावी पचारमे सत्ता हांसील करने इतनी गिरीहुई हरकतों की भाषणबाजी एक दूसरी पार्टियों पर कीचड़ उछालने वालीबात सुनने मिल रहीहो तब जनता के सेवक बनने निकले उम्मीदवारों के मुंह से जनताकी सुविधा, सुरक्षा, रास्ता, पानी, बिजली, घर जैसी सुविधा देनेकी बातें एकभी नेताके मुंहसे सुनाई नहीं देती है तब स्वतंत्र भारतकी बात नेताओं की मुखबानी से सत्ता हासिल करने वाले नेताओं का निजी फायदा करवाएगी या जनता के लिए फायदेमंद साबित होगी वो सोचने ओर समझने वाली बात जनताके लिए बनगई है।
आखिरी एक ही मुद्देकी बात राजकीय दलोंका उमीदवार के लिए बनचुकी है मतदाताओं को वचनों से बांधलो ओर पांचसाल तक अपना खुदका विकाश करो वोही प्रथा रहेगी वहां जनता की उम्मीदों की सुविधा राजकीय उम्मीदवार कहासे पुरी कर पाएंगे।
