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POCSO मामले में सबूतों के अभाव में सभी आरोपियों को रिहा – एडीजे स्पेशल POCSO कोर्ट का फैसला

 बोकारो से विशेष रिपोर्ट

नेशनल हेड एवं लीगल एडवाइजर, अधिवक्ता राजेश कुमार

POCSO मामले में सबूतों के अभाव में सभी आरोपियों को रिहा – एडीजे स्पेशल POCSO कोर्ट का फैसला

रितुडीह (बोकारो), 21 मई 2025: बोकारो जिले के रितुडीह थाना क्षेत्र के सरदार कॉलोनी में एक नाबालिग लड़की (16 वर्ष) द्वारा दर्ज कराए गए POCSO एक्ट के मामले में स्थानीय न्यायालय ने आज बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।

अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (स्पेशल POCSO कोर्ट), श्री देवेश कुमार त्रिपाठी ने मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों में पीड़िता के बयान, चिकित्सकीय रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों में पर्याप्त संगति नहीं पाई गई। इसलिए आरोप सिद्ध नहीं हो सके।

घटना का कथित विवरण

पीड़िता ने अपने आवेदन में आरोप लगाया था कि 16 मई 2025 को सुबह करीब 10:30 बजे वह मोबाइल बनाने जा रही थी। इसी दौरान उसके कथित दोस्त रिषि, दीपक चौधरी, विक्की कुमार, राकेश कुमार और सुरज शर्मा ने उसके साथ बलात्कार का प्रयास किया तथा मोबाइल व 3,200 रुपये छीन लिए। पीड़िता ने बताया कि डर के मारे उसने तुरंत घरवालों को नहीं बताया, लेकिन 19 मई 2025 को पूरे परिवार के साथ थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।

इस आधार पर 21 मई 2025 को रितुडीह थाने में FIR नंबर 41125 दर्ज की गई। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की विभिन्न धाराओं के अलावा POCSO एक्ट की धारा 4 भी लगाई गई थी। पुलिस ने बाद में पांचों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी थी।

बचाव पक्ष की मजबूत दलीलें

आरोपियों की ओर से अधिवक्ता राजेश कुमार चौधरी ने कोर्ट में जोरदार बहस की। उन्होंने कहा कि

पीड़िता का बयान और चिकित्सकीय रिपोर्ट में कोई सुसंगतता नहीं है।

घटना स्थल पर कोई स्वतंत्र गवाह नहीं है।

मोबाइल व रुपये छीनने का कोई ठोस सबूत नहीं मिला।

पूरा मामला मात्र संदेह पर आधारित है, जो कानून के अनुसार पर्याप्त नहीं है।

अधिवक्ता राजेश कुमार चौधरी ने जोर देकर कहा, “बिना पुख्ता सबूत के किसी भी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। POCSO जैसे गंभीर मामलों में भी न्याय केवल सच्चाई पर टिका होता है, न कि भावनाओं पर।”

न्यायालय का फैसला

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद एडीजे स्पेशल POCSO कोर्ट ने फैसला दिया कि उपलब्ध साक्ष्यों से कोई भी आरोप सिद्ध नहीं होता। परिणामस्वरूप सभी पांच आरोपियों – रिषि, दीपक चौधरी, विक्की कुमार, राकेश कुमार और सुरज शर्मा को तत्काल रिहा कर दिया गया।

महत्वपूर्ण संदेश

यह फैसला एक बार फिर POCSO जैसे संवेदनशील मामलों में “सबूत ही सब कुछ” के सिद्धांत को रेखांकित करता है। अदालत ने साफ किया कि केवल आरोप लगाने भर से किसी को दोषी नहीं माना जा सकता।

दोनों पक्ष अब उच्च न्यायालय में अपील का अधिकार रखते हैं।

निष्कर्ष

बोकारो की इस अदालत ने साबित कर दिया कि भारतीय न्याय व्यवस्था अभी भी सबूतों पर आधारित है, न कि दबाव या अफवाहों पर। पीड़िता और आरोपियों दोनों को न्याय मिला – पीड़िता को सुनवाई का मौका और आरोपियों को बरी होने का अधिकार।

यह रिपोर्ट विशेष रूप से तैयार की गई है ताकि जनता को सही जानकारी मिल सके और कानूनी प्रक्रिया के प्रति विश्वास बरकरार रहे।

– अधिवक्ता राजेश कुमार

नेशनल हेड एवं लीगल एडवाइजर

(बोकारो से विशेष

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