ब्युरोचीफ शैलेन्द्रसिंह बारडोली गुजरात
गुजरात में भरूच ज़िले के अंकलेश्वर शहर मे मराठी समुदाय ने पारंपरिक तरीके से गुड़ी पड़वा का नव वर्ष उत्साही माहोल मे मनाया।
महाराष्ट्र प्रांत के गुजरातमे रहनेवाले समुदाय चैत्री नवरात्रि उत्सव हरसाल सुद एकम को मनाते है। जिसका अर्थ है मराठी समुदाय का नव वर्ष। लोगों ने अपने घरों के बाहर गुड़ी लगाई और पूजा-अर्चना की।घर-घर जाकर पूरनपोली खाने की अनूठी परंपराचैत्र सुद एकम, जो मराठी समुदाय का नववर्ष है, को अंकलेश्वर में रहने वाले मराठी समुदाय द्वारा पारंपरिक रूप से अपने घरों के बाहर गुड़ी या झंडे बांधकर मनाया जाता था।
हर साल की तरह, अंकलेश्वर में रहने वाले मराठी समुदाय ने पारंपरिक और भक्तिमय माहौल में गुड़ी पड़वा यानी नव वर्ष और विजय पर्व मनाया।मंगल मुहूर्त के दिन सुबह घरों में गुड़ी (झंडा) फहराने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। घर में गुड़ी (झंडे जैसी संरचना) खड़ी की जाती है, जो विजय, सम्मान और समृद्धि का प्रतीक है।
इस त्योहार को घर-घर जाकर पूरनपोली खाकर और रिश्तेदारों को खिलाकर मनाया जाता था। ऐसा माना जाता है कि गुड़ी पड़वा के दिन ही भगवान ब्रह्मा ने ब्रह्मांड की रचना शुरू की थी।
इस दिन भगवान राम रावण को पराजित करके अयोध्या लौटे थे, इसलिए लोग इस दिन को विजयोत्सव के रूप में मनाते हैं। इसी संदर्भ में गुड़ी पड़वा का यह त्योहार प्रतिवर्ष मनाया जाता है। गुड़ी पड़वा को 'वर्ष प्रतिपदा' के नाम से भी जाना जाता है।
