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गुरुदेव के चरण कमलों की महिमा -जहां मृत्यु भी छू नहीं सकती: आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज

 गुरुदेव के चरण कमलों की महिमा -जहां मृत्यु भी छू नहीं सकती: आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज

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           "सादर जय सियाराम"

गुरुदेव के चरण कमलों की महिमा -जहां मृत्यु भी छू नहीं सकती !

गुरुदेव से कपटपूर्ण व्यवहार करने वाले शिष्य ज्ञान प्राप्ति का पात्र नहीं रहता है ।

गुरुदेव से छल कपट करना स्वयं के पैर पर कुल्हाड़ी मारने के जैसा है ।

गुरुदेव से कपटपूर्ण व्यवहार से शिष्य का आध्यात्मिक विकास रुक जाता है ।

आचार्य की सेवा ही सर्वोत्तम साधना है ।

गुरुदेव की सेवा ही सर्वोत्तम साधना है ।

पूज्य गुरुदेव भगवान के कृपा से आशीर्वाद से असंभव कार्य भी संभव हो जाता है ।

एक शिष्य अपने पूज्य गुरुदेव भगवान के आदेश से भिक्षाटन करने के लिए निकला था ।

वहां एक ऋषि का आश्रम था वहां उन्होंने उस शिष्य को श्राप दिया कल सूर्योदय होने से पहले तुम्हारा मृत्यु निश्चित है ।

वह शिष्य रोते बिलखते हुए पुनः आश्रम वापस आ गया ।

कहां जाता है कि ऋषियों का श्राप यमराज का निमंत्रण बन जाता है ।

अपितु वह बालक कोई अपराधी नहीं था ।

केवल अपने पूज्य गुरुदेव भगवान के आदेश से भिक्षाटन करने गया था ।

एक साधारण शिष्य था लोग फूंस फुसाने लगें कि

इस बालक का मृत्यु निश्चित है ।

बालक भयभीत होकर रोते बिलखते हुए पुनः अपने पूज्य गुरुदेव भगवान के आश्रम वापस लौट आया ।

पूज्य गुरुदेव ने पूछा भिक्षा मिला ?

बालक ने अश्रुपूर्ण आंखों से पूज्य गुरुदेव भगवान से कहा कि मैं आज भिक्षा में मृत्यु लाया हूं ।


गुरुदेव मंद मुस्कुरायें और बोलें रात अभी बाकी है ।

जो गुरुदेव का चरण पकड़ कर रखता है ।

जो गुरु चरण पकड़ कर रखता है 

उसके लिए कोई अंत नही होता हैं ।

रात उतर आई पहले पहर में धन संपत्ति का लोभ आया बालक बोला जो देना हो सामने आकर दे दों मैं गुरु चरण नहीं छोडूंगा ।

दूसरे पहर में मां के स्नेह की माया आई ।

हृदय कांप उठा आंखें भर आईं फिर भी उसने कहा सच में मां हो तो आशिर्वाद दो ।

मैं गुरु चरण नहीं छोडूंगा ,

तीसरे पहर में मृत्यु की छाया आई ।

गंभीर स्वर में आदेश हुआ समय पूर्ण बालक निर्भय होकर बोला मृत्यु यदि आए भी गुरु चरण मैं नहीं छोडूंगा ।

पहली बार मृत्यु मौन होकर लौट गयी ।

भोर हुई सूरज उगा गुरुदेव ने आंखें खोली कहा देखों तुम अभी भी जीवित हों बालक चरणों में गिर कर रोते हुए बोला जिसके सिर पर सच्चे गुरु का हाथ होता है ।

उसे मृत्यु छू भी नहीं सकती है ।

विश्वास ही जीवन कुछ सबसे बड़ी शक्ति है ।

पूज्य गुरुदेव भगवान और भगवान पर अटूट विश्वास हो तो भय , लोभ , माया हमें कुछ भी हरा नहीं सकता ।

जीवन थोड़ा है मृत्यु कब आ जायेगी यह निश्चित नहीं है ।

अतः बहुत ही ध्यान , बहुत ही गंभीरता से गुरु की सेवा में लग जाओं आध्यात्म मार्ग तेज धार वाली तलवार का मार्ग है ।

जिसको इस मार्ग का अनुभव है ऐसे पूज्य गुरुजनों का की संग करने की आवश्यकता है ।

जीव को सदा-सर्वदा भगवान का आश्रय लेना चाहिए ।

जीव का परम आश्रय भगवान ही है ।

आपका मार्गदर्शक आपके पूज्य गुरुदेव ,

[आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज]

संपर्क सूत्र:-6396372583,

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