ब्राह्मणों को सताना तो देवताओं का भी क्षय कर देता है: आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज
🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏🌹🌹"सादर जय सियाराम"
"नवनीतं हृदयं ब्राह्मणस्य बाचि क्षुरो निहितस्तीक्ष्ण धार:" महाभारतम्-आदिपर्व- 3।123
ब्राह्मणनां परिकेल्शो देवतान्यपि सादयेत् महाभारतम् वनपर्व 2।4।
ब्राह्मणों को सताना तो देवताओं का भी क्षय कर देता है ।
वेद : पश्यन्ति ब्राह्मणा: महाभारतम् उद्योतपर्व 34।34
ब्राह्मण वेद रुपी आंख से देखते हैं ।
अर्थात ब्राह्मण का आंख वेद है ।
वेदाध्ययन से ब्राह्मण की श्रेष्ठता है ।
ब्राह्मण को नित्य स्वध्याय करना चाहिए ।
ब्राह्मण में सदैव सत्य स्थाई होता है ।
चार पैरो वाली में गों उत्तम है ।
धातुओं में सोना उत्तम है ।
दो पायों में ब्राह्मण उत्तम है श्रेष्ठ है ।
ब्राह्मण जन्म से ही पृथ्वी का स्वामी होता है ।
और प्राणी मात्र के धर्म- कोश की रक्षा करने में के समर्थ होता है ।
ब्राह्मण सदैव अपना खाता है ।
और अपना पहनता है ।
और अपने से ही दूसरों को देता है ।
ब्राह्मणे दारुणं नास्ति मैत्रो ब्राह्मण उच्चते ।
आचार्य: सर्वभूतानां शास्ता कि प्रहरिष्यति ।।
महाभारतम् अनुशासनपर्व 27।12।
ब्राह्मण में कठोरता नहीं होती , ब्राह्मण सदैव मैत्र होता है ।
ब्राह्मण सदैव प्राणी मात्र का मित्र होता है ।
ब्राह्मण सदैव प्राणी मात्र का हितैषी होता है ।
सबका मंगल चाहने वाला होता है ।
प्राणी मात्र का सदैव मंगल के लिए लगा रहता है ।
और हर एक से मित्र का व्यवहार करता है ।
और सब प्राणियों का आचार्य , अनुशासन करने वाला वह कभी किसी पर प्रहार नहीं करता है ।
. वायु को मुठ्ठी में बंद करना मुश्किल है ।
. चांद को हाथ से छूना मुश्किल हैं ।
. पृथ्वी को उठाना मुश्किल हैं ।
और लोको में ब्राह्मण से जितना मुश्किल हैं ।
आकाश (गगन आसमान) को छूना असंभव है ।
हिमालय पर्वत को हिलाना असंभव है ।
गंगा के प्रवाह को रोकने के लिए बंध लगाना असंभव है ।
इसी तरह इस लोक में ब्राह्मणों को जितना असंभव है ।
ब्राह्मणों का हृदय मक्खन के समान कोमल दयालु होता है ।
जो भगवान विष्णु जी के स्वभाव के अनुरूप है ।
हालांकि उनकी वाणी में उस्तुरे (छूरे) जैसी तीक्ष्णता भी कहीं गई है ।
जिसका अर्थ ज्ञान और सत्य को स्पष्टता से कहना है ।
ब्राह्मण का मुख्य गुण(शास्त्रों के अनुसार):
. हृदय : भगवान श्री हरि विष्णु के सामान कोमल , दयालुत होते हैं ।
. वाणी : तीक्ष्ण (स्पष्ट एवं सत्यवादी)
. स्वभाव : शांति आत्मसंयम , तपस्या , पवित्रता , सहनशीलता , ईमानदारी , ज्ञान , बुद्धि और धार्मिकता ।
. ब्राह्मण ब्रह्म का तेज रखने वाला और "सर्व वंदित"(सभी द्वारा वंदनीय माना गया है ।
. अखंडता : ब्राह्मण अपराधों से वंचित रहता है ।
(स्वच्छ छवि) वाला माना गया है
ब्राह्मण की कोमलता और व्यक्तित्व की एक पहचान है ।
आपका मार्गदर्शक आपके पूज्य गुरुदेव ,
[आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज]
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