आनन्द बॉबी चावला ब्यूरो चीफ झांसी।
25 मार्च 2026
*गर्मीयों में भैंसों की देखभाल बेहद जरूरी, विशेषज्ञों ने जारी की एडवाइजरी*
झांसी।* रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय के वैज्ञानिकों ने बुन्देलखण्ड क्षेत्र के भैंस पालकों के लिए ग्रीष्मकालीन पशु प्रबंधन को लेकर महत्वपूर्ण सलाह जारी की है।महाविद्यालय के डॉ. दीपक उपाध्याय एवं डॉ. दिव्यांशु सिंह तोमर ने बताया कि अप्रैल और मई माह में पड़ने वाली भीषण गर्मी एवं ‘लू’ भैंसों के स्वास्थ्य और दुग्ध उत्पादन पर गंभीर प्रभाव डालती है। भैंसों की त्वचा काली होने और पसीने की ग्रंथियां कम होने के कारण उन्हें गर्मी अधिक लगती है, इससे दूध उत्पादन में गिरावट आती है तथा हीट स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है।
*गर्मी से बचाव के लिए प्रमुख उपाय*
विशेषज्ञों ने भैंस पालकों को निम्न सावधानियां अपनाने की सलाह दी है—
भैंसों को दिन में कम से कम दो बार ठंडे पानी से नहलाएं।
यदि आसपास नदी, नहर या तालाब उपलब्ध हो, तो भैंसों को उसमें तैराने ले जाएं।
पशु बाड़े की दिशा पूर्व-पश्चिम रखें तथा छत पर घास-फूस डालें या सफेद चूने से पुताई करें।
गर्म हवाओं से बचाव के लिए खिड़कियों पर गीली टाट/बोरी लगाएं।
भैंसों को कभी भी सीधी धूप में न बांधें।
पशुओं को चराने के लिए सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक बाहर न निकालें।
*पानी और आहार पर विशेष ध्यान*
गर्मी में पानी की खपत 50% तक बढ़ जाती है, इसलिए दिन में कम से कम चार बार पानी पिलाएं।
बाड़े में हौदी बनाकर 24 घंटे स्वच्छ व ठंडा पानी उपलब्ध कराएं।
आहार में हरा चारा (मक्का, बाजरा) शामिल करें।
शरीर में लवणों की पूर्ति हेतु 50–70 ग्राम मिनरल मिक्सचर प्रतिदिन दें।
दुधारू भैंसों को 100–200 ग्राम बाईपास फैट देना लाभकारी है, इससे बिना अतिरिक्त गर्मी उत्पन्न किए ऊर्जा मिलती है।
*प्रजनन पर रखें नजर*
विशेषज्ञों ने बताया कि गर्मी के मौसम में भैंसों में अक्सर “मूक मद” (साइलेंट हिट) के लक्षण दिखाई देते हैं। ऐसे में किसानों को रात या भोर के समय प्रजनन संकेतों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
वैज्ञानिकों का कहना है कि इन उपायों को अपनाकर भैंस पालक अपने पशुओं को गर्मी के दुष्प्रभाव से बचाते हुए उनके स्वास्थ्य और दुग्ध उत्पादन को बनाए रख सकते हैं।
आनन्द बॉबी चावला झांसी।
