ब्यूरोचीफ शैलेन्द्रसिंह बारडोली गुजरात
जंखवाव में टीबी निदान शिविर का आयोजन किया गया जिसमे बड़ी संख्यामे लोगोंने हिस्सा लिया।
खास करके आदिवासी क्षेत्रके गावों मे ज्यादा लोग टीबी की बीमारी से पीड़ित देखने मिलते है ओर उसके इलाजकी भी उतनीही आवश्यकता मरीजो के लिए होती है।गुजरात सरकार के कार्यक्रम अंतर्गत मांगरोल तालुका के जंखवाव ग्राम पंचायत ऑफिस पर"टीबी मुक्त भारत" अभियान के अंतर्गत केम्प का आयोजन हुआ।
टीबी एक संक्रामक बीमारी है, जो ट्यूबरक्युलोसिस बैक्टीरिया के कारण होती है। इस बीमारी का सबसे अधिक प्रभाव फेफड़ो पर होता है। उनके अलावा ब्रेन, यूटरस, मुंह, लिवर, किडनी, गले आदीमे भी टीबी की बीमारी हो सकती है।
ट्यूबर क्युलोसिस (टीबी) होने के कई वजह की जानकारी मरीजोको दी गई साथमे उस बीमारीमे क्या क्या संभालना होताहे ओर इलाज कैसे होता है उनपर अधिक जानकारी दी गई।
सूरत स्थित जिला टीबी केंद्र और डीटीओ डॉ. दिनेश वसावा और टीएचओ डॉ. समीर चौधरी ने दीपक फाउंडेशन के सहयोगसे, मांगरोल तालुका के पीएचसी लवेट के अंतर्गत सीएससी जंखवाव में टीबी निदान शिविर का आयोजन किया।
इस शिविर में छाती का एक्स-रे, सीबीसी और नेत्र जांच की उपलब्ध सुविधाओ का नजदीकी गांवोंके लोगोंने निःशुल्क जांच करवाई।
टीबीमुक्त भारत के केम्प में पूर्व सरपंच उमेद भाई चौधरी इस शिविर में उपस्थित थे। साथ ही, पीएचसी लवेट की डॉ. कृति सिंहला, एसटीएस सलमान भाई पठान, एसटीएलएस प्रणव पटेल, एमपीएचडब्ल्यू जयदीप भाई महिदा, एमपीएचडब्ल्यू विपुल गामित और सीएचओ दीपिका बेन चौधरी ने भी कार्य में हिस्सा लिया
