ब्यूरोचीफ शैलेन्द्रसिंह बारडोली गुजरात
सुरत शहर की चौंकाने वाली घटना: गरदन पर घुसे ओर कानोपे लात नशामुक्ति केन्द्र के चार पार्षदोंने मिलकर मरीज की हत्या कर दी।
सूरत शहर के डूमस रोड स्थित सुल्तानबाद में 'रीवा नशा मुक्ति केंद्र' में सजा ए मौतकी दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जो मानवता को कलंकित करके कानून व्यवस्था को चुनौती देती है।नशा मुक्ति केंद्र में नशा उपचार के लिए भर्ती कियागया 32 वर्षीय युवक धवल जयंतीभाई राठौड़ की संस्था के पार्षदों और ड्राइवर ने बेरहमी से हत्या कर दी।
मृतक धवलभाई एक पुलिस निरीक्षक के भाई थे, फिर भी इन बदमाशों ने तालिबानी सजा देकर उन्हें निर्दयतासे मारके मौतके घाट उतारा। चारों आरोपियों को हत्याके जुर्ममे गिरफ्तार कीया गया।
मरीजने दवा लेने से इनकार करने पर पार्षद जिग्नेश आगबबूला होगया। यह घटना 1 मार्च रात 9 बजेसे शुरू हुई। धवल राठौड़ को 28 फरवरी को डूमस के सुल्तानबाद स्थित 'रीवा एडिक्शन एंड रिहैब सेंटर' में नशे की लत के इलाज के लिए भर्ती कराया गया था।
रविवार रातको संस्थाके पार्षद जिग्नेश भास्करभाई देसाई धवलके पासगए और उनसे इलाजकी गोलियां लेनेको कहा। जैसेही धवलने गोलियां लेनेसे इनकार किया, जिग्नेश अचानक भड़क गए। उन्होंने बिना किसी कारण बताए धवल को ज़ोरदार थप्पड़ मार दिया। इसी बात पर धवल और जिग्नेशके बीच झगड़ा शुरू होगया।'तुम्हारे जैसे कई लोगों को सबक सिखाने' की धमकी देनेके बाद रिहैब सेंटरके चारलोग टुटपडे मरीज धवल कुछ सोचे उससे पहलेही इतने बेरहमीसे जानवर जैसी पिटाइमे मरीजकी इलाजसे पहलेही मौकेपर उनकी मौतके मामलेमे चारों हत्यारोको गिरफ्तार किया गया।
धवल ने अपना बचाव करने के लिए चिल्लाया, तो संगठन के अन्य पार्षद रोहन, शैलेश और संगठनकी गाड़ी ड्राइवर दिलीप नीचेसे दौड़कर आए। चारोंने मिलकर धवलको गाली देना शुरू कर दिया। आरोपी रोहनने अपनी औकात दिखाना शुरू किया ओर धवल की आंखों में आंखें डालकर धमकी भी दी, "मैंने तुम्हारे जैसे कई लोगोंको सुधाराहै, तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई हमारे खिलाफ जानेकी? आज हम तुम्हें नहीं छोड़ेंगे, हम तुम्हें जानसे मार देंगे।"
आरोपियों ने उसे बिस्तर पर पेट के बल लेताकर और उसके हाथ-पैर रस्सीसे बांधकर क्रूरताकी सारीहदें पार करदीं। ड्राइवर दिलीप बिल्डिंगके नीचे नीचे जाकर लाठी ले आया। उसके बाद रोहन, शैलेश और दिलीप ने धवल को बिस्तर पर सुलाकर धवलके हाथों और पैरोंको इतनी कसकर पकड़ रखाथा कि धवल थोड़ाभी हिलनहीं पारहा था।
धवल कराहता रहा और जिग्नेश उसे लाठी से मारता रहा। जिग्नेश देसाईने दिलीपसे लाठी छीनली और धवल को प्रताड़ित करना शुरूकिया। लाठी एकके बादएक धवल के शरीरपर पड़ती रही। धवल गिड़गिड़ाता रहा "मुझसे गलती होगई, मुझे माफ करदो, अब मैं गोलियां खालूंगा।" लेकिन जिग्नेशके सरपर खूनका भुत सवारथा।
वह दहाड़ते हुए बोला, "तुम मुझे जानते नहीं, मेरे सामने बोलनेकी हिम्मत कैसे हुई?" जिग्नेशने डंडेसे धवलके सिर, कमर और शरीरके नाजुक हिस्सों पर वार किया।
गर्दन पर घूंसे और कानों पर लात: चारों आरोपियोंका हमला सिर्फ लाठी तकनहीं बल्कि अन्य आरोपियोंने भी इसमें बेरहमीसे मारनेमे हाथ बटाया। ड्राइवर दिलीपने बिस्तरसे बंधे धवल की गर्दनपर बारबार घूंसे मारे, जिससे धवलकी सांस फूलने लगी। शैलेशने भी धवलके गालों और कानोंपर जोरदार घूंसे मारे।
रोहनने धवल पर अपने नंगे हाथों और नाखूनोंसे बेरहमीसे हमला कियाथा, उसके सीने और पेटपर वार किए थे। उन चारों ने मिलकर धवल को खून से लथपथ और अधमरा छोड़ दियाथा।
लगातार पिटाई और यातना के कारण धवल राठौड़ बेहोश होगया था। जब आरोपियोंको लगाकि धवल हिल-डुल नहीं रहेहैं, तब घबराकर उन्होंने 108 एम्बुलेंसको बुलाया और उन्हें इलाज केलिए नई सिविल अस्पताल भेजा। हालांकि, अस्पताल पहुंचने तक बहुतदेर हो चुकीथी। ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरोंने उनकी जांचकी और धवलको मृत घोषित कर दिया।
पुलिस अधिकारी के भाई की इस क्रूर हत्या को लेकर पुलिस बलमें भी काफी आक्रोश है। मृतक धवलके भाई राजकोट में एक निजी पुलिस अधिकारी हैं।
इस मामले में मिली शिकायतके आधार पर डूमस पुलिसने आरोपी जिग्नेश भास्करभाई देसाई, रोहन, शैलेश और दिलीप के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा के तहत हत्या का मामला दर्ज किया है।
पुलिस ने बतायाकि चारों आरोपियोंने मिलकर सुनियोजित साजिश रची और धवलको गंभीर रूपसे घायल करके उनकी हत्या करदी। सभी आरोपियोंको गिरफ्तार कर लिया गया है।
बारदोली कस्बेके नशा मुक्ति केंद्रमें होरहे मरीजोपर अमानवीय अत्याचार चर्चाका केंद्र बन गए हैं, यहां तक कि सूरत के पुनर्वास केंद्र में हुई घटना कोभी उन्होंने शर्मिंदा कर दिया है।
हाल ही में बारदोली स्थित एक पुनर्वास केंद्रके निदेशक केसाथ हुई मारपीट की घटना ने काफी चर्चाएँ छेड़ दी हैं। यह घटना तब हुई जब रिहैब संचालक ओर साथमे एक आदमी शराब शबाब और कबाब पार्टी करके रातको जब दमणसे बारडोली आनेको निकले तभी दोनोको रास्तेमे मार खाना पड़ाथा इतनाही नहीं लोग इकठ्ठा होते देखके भागना पड़ाथा ऐसे में, सवालये उठरहा है जब निदेशक स्वयं शराबकी लतसे मुक्त नहीं हैं तो ऐसेमें नशामुक्ति केंद्रका क्या महत्व है?
नशा छोड़नेकी कोशिश कररहे मरीजों की बेरहमी से पिटाई होनेकि कई शिकायतें भूतकालमे उठीथीं और हालहीमें एक मरीजको इतनी बेरहमी सेपीटागया कि उसे इलाज केलिए कई दिनोंतक एकनिजी अस्पतालमें भर्ती रखना पड़ा। सुननेमें आयाहै कि अतुल नामका मरीज अभीभी दर्दसे जूझ रहाहै। इस तरह की बेरहम यातना झेलने के बाद,भारी फीस वसूलने वाले पुनर्वास केंद्र के प्रबंधक के खिलाफ जांच अनिवार्य होगई है। ओर अतुल नामके मरीज कौन उसकी भी जांच होनी आवश्यकता है।

