आनन्द बॉबी चावला। ब्यूरो चीफ झांसी।
5 मार्च 2026
*रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय का 13वां स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया*
झांसी। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी का 13वां स्थापना दिवस गुरुवार को हर्षोल्लास और गरिमामय वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की स्थापना, उसके गौरवशाली इतिहास, समृद्ध विरासत तथा शैक्षणिक उपलब्धियों को स्मरण किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के सभी संकाय सदस्य, अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ कृषि विज्ञान मंडपम में उपस्थित रहे।स्थापना दिवस के अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में पौधरोपण कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इस दौरान पूर्व महानिदेशक डॉ. आर.एस. परोडा, कुलपति प्रो. अशोक कुमार सिंह तथा काफरी के निदेशक डॉ. ए. अरुणाचल ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में मौलश्री का पौधा रोपित किया।
इसके बाद कृषि विज्ञान मंडपम में दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया तथा वंदे मातरम् के सामूहिक गायन के साथ समारोह की शुरुआत हुई।
*मुख्य अतिथि डॉ. आरएस परोडा ने कृषि के महत्व पर दिया जोर*कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पद्म विभूषण पुरस्कृत, पूर्व सचिव, डेयर एवं पूर्व महानिदेशक भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् नई दिल्ली के डॉ. आर.एस. परोडा ने कहा कि झांसी की वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई महान स्वतंत्रता सेनानी थीं और उनके नाम पर स्थापित यह विश्वविद्यालय बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए गौरव की बात है।
उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका है। देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री द्वारा दिया गया नारा “जय जवान, जय किसान” आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने कृषि क्षेत्र में मानव संसाधन विकास, आधुनिक तकनीक, हाइब्रिड किस्मों, उर्वरकों, सहकारी संस्थाओं और किसानों के संगठन (एफपीओ) को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
डॉ. परोडा ने कहा कि किसान आत्मनिर्भर होता है और वह अपने परिश्रम से समाज की आवश्यकताओं की पूर्ति करता है। भारत की अर्थव्यवस्था, जीडीपी और राष्ट्रीय विकास में कृषि का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने जैविक खेती, बायोफर्टिलाइजर, ड्रोन तकनीक, पॉलीहाउस खेती, एग्रोफॉरेस्ट्री तथा मृदा स्वास्थ्य सुधार जैसे विषयों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य को प्राप्त करने में कृषि क्षेत्र की अहम भूमिका पर भी प्रकाश डाला।
*कुलपति प्रो. अशोक कुमार सिंह ने विकास कार्यों की दी जानकारी*
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. अशोक कुमार सिंह ने विश्वविद्यालय में किए जा रहे विकास कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों के लिए हॉस्टल सहित अनेक सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं। साथ ही झांसी, दतिया एवं मुरैना में चल रहे विभिन्न विकास कार्यों से भी सभी को अवगत कराया।
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों का चयन बिहार लोक सेवा आयोग सहित देश की विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थाओं में हुआ है, जो विश्वविद्यालय के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय बुंदेलखंड क्षेत्र के विकास के लिए निरंतर कार्य कर रहा है तथा यहाँ देश के विभिन्न राज्यों से विद्यार्थी अध्ययन करने आते हैं।
*विशिष्ट अतिथि डॉ. ए. अरुणाचलम ने विश्वविद्यालय की प्रगति को सराहा*कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि काफरी, झांसी के निदेशक डॉ. ए. अरुणाचल ने कहा कि यह विश्वविद्यालय राष्ट्रीय महत्व की संस्था है, जहाँ देश के 24 राज्यों के छात्र-छात्राएँ अध्ययन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले दस वर्षों में विश्वविद्यालय ने उल्लेखनीय प्रगति की है तथा झांसी के साथ-साथ दतिया और मुरैना में भी इसका विस्तार हुआ है।
*सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समां*
कार्यक्रम में कुलसचिव डॉ. एस.एस. कुशवाह ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए उनका परिचय कराया।
कुलपति प्रो. अशोक कुमार सिंह ने मुख्य अतिथि को पुष्पगुच्छ, स्मृति चिन्ह, रानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा तथा अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया, वहीं विशिष्ट अतिथि को भी स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुआ। इस अवसर पर विश्वविद्यालय में अध्ययनरत 24 राज्यों के विद्यार्थियों द्वारा अपने- अपने राज्यों की आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियाँ दी गईं, जिनकी उपस्थित लोगों ने सराहना की।
इस अवसर पर विवि झांसी एवं दतिया महाविद्यालय के अधिकारी, वैज्ञानिक, विभागाध्यक्ष, विद्यार्थी तथा विश्वविद्यालय के शैक्षणिक एवं अशैक्षणिक कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
आनन्द बॉबी चावला झांसी।



