ब्यूरोचीफ शैलेन्द्रसिंह बारडोली गुजरात
बारदोली नगर निगमका वह कृत्य जिससे शहरवासियों को नुकसान हो रहा है ऐसा प्रदूषित ड्रेनेज का पानी मिढ़ोलानदी में बहाना।
नगर प्रशासन शहर के लोगों को उचित सुविधाएं प्रदान करने में पूरी तरह विफल रहा है!
भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुकी बारडोली नगरपालिका के पापोंसे मिढ़ोलानदी के पानी ड्रेनेज के गंदे पानीसे प्रदूषित हो रही है, जो लोगों की आस्था का घोर अपमान है!पवित्र मिढ़ोलानदी जो शहर और तालुका के लोगों के लिए धार्मिक मान्यताओं के साथ पूजा स्थल के रूप में जुड़ी हुई है, दिन-ब-दिन गंभीर रूप से प्रदूषित होती जा रही है।
लेकिन आखिर नगर पालिका अधिकारियों को इस गंभीर मामले की जानकारी कैसे होगी? शाम को राधाकृष्ण मंदिर के पीछे किनारे पर देसी शराब पीनेवालो लोगों का जमावड़ा लग जाता है।
इतना ही नहीं, पीने के बाद वे खाली शराब की प्लास्टिक मिढ़ोला नदी के बहते पानी में फेंक देते हैं, लेकिन आज तक नगरपालिका अधिकारियों ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया।
दूसरी ओर, गणेश चतुर्थी जैसे लोक धार्मिक उत्सव के विसर्जन के दौरान, नगरपालिका अधिकारी जल प्रदूषण का बहाना बनाकर गणेश मंडलों के सामने सरकारी अधिकारियों को सामने करदिया जाताहै जिसका सीधा मकसद अपनी चमड़ी बचाना होता है। साथमे उद्देश्य सांपको भी नही मारते और लाठियों को सुरक्षित रखने की नीति के कारण, गणेश मंडल में श्रीजी की एक भी मूर्ति का विसर्जन नहीं हो रहाहै।नगर मे प्रदूषण को लेकर इतनी चिंताएं हैं इसलिए, शहर के लोग अधिकारियोंसे सीधा पूछ रहे हैं,जब शहर की ड्रेनेज के बदबूदार नालेके पानी मिढ़ोलानदी में बहाया जा रहाहै, तो क्या नगरपालिका अधिकारी उस प्रदूषित नाले के पानी को गंगा के पानी के बराबर समझते हैं?।
दूसरी ओर, अभी फिलहाल शादी का मौसम चल रहा है, इसलिए कई शादियां का कार्यक्रम सम्पन्न होते पूरे कचरे मिढ़ोलानदी में बेफिक्र होके फेक देते है फिरभी पालिका के दिमागमे सब सलामत।जब कचरा फेंका जा रहाहै उनकी जानकारी नगरपालिका के जिम्मेदार मुख्य अधिकारी के पास थी तबये बात को नजरंदाज क्यू किया गया?।
ऐसे गंभीर मामलों पर ध्यान क्यों नहीं दिया?उन्होंने इन लोगों जो कचरा सीधे नदीमे डालने वालों पर गौर क्यों नहीं किया?।
जनता की आंखो के सामने पानी दूषित करने वाले लोगको उसी समय पकड़के उनके खिलाफ कानूनी करवाई पालिका ने क्यों नहीं की?
आप अफसर हो ऐसी बात थोड़े समय तक बाजू रखकर आम नागरिक ओर एक सच्चे पर्यावरण प्रेमी होने के नाते भी मिढ़ोलानदी के प्रदूषण को रोकने की जिम्मेदारी लेके पास मे लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच क्यू नहीं कीगई?।
यही बात अपनी नैतिकता ओर जिम्मेवारी का परिचय करवाती है जानताके सवालों से घिरे नगरपालिका अधिकारी, यदि सक्रिय होते, तो पवित्र नदी निंदोलाके किनारे कचरे के ढेर से प्रदूषित नहीं होती।
अग्निशामक दल की इमारत के पीछे बदबूदार नाले से प्रदूषित पानी का बहाव कब बंद होगा? ऐसे समय में जब शहर के लोग मांग कर रहे हैं कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत सरकार द्वारा आवंटित धन का उपयोग जनता के हित में करके गंदी नालिके ड्रेनेज का पानी पवित्र मानीजाती मिंदोला नदीमे बहाया जाता है उनको स्थायी रूप से तुरंत बंद करनेका कार्य शुरूकिया जाए।
तालुका के लोग बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं कि अधिकारी कब काम शुरू करने का मूर्हत निकलवाके तारीख की घोषणा करेंगे, इससे पहले कि तरह पवित्र नदीका दर्जा प्राप्तकरे उसका काम तुरंत शुरू कियाज़ए अगर उसमें देरी हुईतो
आस्था प्रेमी जनता का गुस्सा हकीकत बनके कही सामने नहीं आजाए ।
