ब्यूरोचीफ़ शैलेन्द्रसिंह बारडोली गुजरात
दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी ने देश के लिए हमेशा यही कहा था कि कानून का पालन इस तरह होना चाहिए कि लोगों के साथ कोई भेदभाव न हो। जन्म, जाति, धर्म पर आधारित शासन प्रणाली में जीना लेकिन देश की जनता कमभागी।उससे बिल्कुल विपरीत है। भारत एक लोकतंत्र देश में लोगों की स्वतंत्रता पर हमला किया जा रहा है। क्या प्रधानमंत्री मोदी यूजीसी के इस काले कानून को देश में लाकर और संविधान का गला घोंटने की कोशिश करके मे लगे है।
लोगों में नफरत पैदा करना और देश को गरीब बनाना चाहते हैं? और अगर यूजीसी के इस काले कानून को सम्मानपूर्वक वापस नहीं लिया गया, तो नेपाल जैसी स्थिति अवश्य उत्पन्न हो जाएगी।
यूजीसी का यह काला कानून देश के लिए एक गंभीर खतरा साबित होगा और सभी राज्यों, जिलों और तालुकों में लोगों के बीच एक उबलते हुए बर्तन जैसी स्थिति है।क्या आरक्षण में कमी, जो अब यूजीसी के नए नियमों के जहर के रूप में सामने आ रही है, बच्चों के भविष्य में घुल रही है?
देश ऐसे फैसले चाहता था जो छात्रों को आपस में जोड़ें, लेकिन ये नियम लाए जा रहे हैं जो छात्रों के बीच जातीय खाई को और गहरा कर देंगे।
यह शिक्षा कोई सुधार नहीं है, बल्कि यह भावी पीढ़ियों को वितरित करने का एक खतरनाक प्रयोग है।
इसके परिणाम समाज के लिए विनाशकारी होंगे।आरक्षण के बाद अब यूजीसी के नियम लागू!
बच्चों की शिक्षा में सुधार नहीं, बल्कि समाज को जहर देने की तैयारी।छात्रों को अलग-अलग जगहों पर भेजने की नीति देश को तोड़ देगी।इसे तुरंत रोकना होगा।
मोदी जी, अगर आपको लगता है कि हम ही अपराधी हैं।सिर्फ हम ही नस्लीय भेदभाव करते हैं। दलित ओबीसी दूध से धुला हुआ है।
इसलिए आपने हमें बर्बाद करने के लिए यूजीसी बिल लाया है। बेहतर होगा कि हम अलग विश्वविद्यालय बनाएं। आरक्षण वाले लोग अलग तरह से पढ़ते हैं, हम अलग तरह से पढ़ते हैं। उसके बाद कोई भी आरक्षण वाला भेदभाव का नाटक नहीं कर पाएगा।
यूजीसी की अमलवारी के बाद भी क्या सुन के आप चुप बैठे रहेंगे कुछ नहीं तो अपने बच्चों की भविष्य के बारे मेभी सोचो।
आप हमारे लाडले बच्चों को कब तक जेल की सलाखों के डर में रखेंगे? ओर आप ऐसे काले कानून का अमलवारी करके आपको देश पर राज करना कोई हक़ बनता है।
मोदीजी अभी भी जाग जाओ देश में काले UGC का कानून के खिलाफ असहमति की चिंगारी लग चुकी है

