लोकेशन महाराष्ट्र से नेशनल न्यूज़ के लिए नेशनल हेड एवं लीगल एडवाइजर अधिवक्ता राजेश कुमार की विशेष रिपोर्ट।
गणतंत्र दिवस 2026: महाराष्ट्र में मंत्री के भाषण से उपजा विवाद - अंबेडकर की अनदेखी और एक महिला अधिकारी की बहादुरी
परिचय26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ था, जिसने हमें एक स्वतंत्र गणतंत्र बनाया। यह दिन हर साल गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है, जहां राष्ट्र का सम्मान, संविधान की गरिमा और उसके निर्माताओं को याद किया जाता है। लेकिन इस साल, 2026 के गणतंत्र दिवस पर महाराष्ट्र के नासिक में एक ऐसी घटना घटी जो पूरे देश को सोचने पर मजबूर कर देती है। राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री गिरीश महाजन ने अपने भाषण में डॉ. भीमराव अंबेडकर का नाम तक नहीं लिया, जिन्हें संविधान का प्रमुख निर्माता माना जाता है। इस पर वन विभाग की एक महिला अधिकारी, माधुरी जाधव ने खुलकर विरोध जताया, जिससे विवाद की लहर दौड़ गई।a7c410 यह घटना न केवल संविधान के प्रति सम्मान की कमी को उजागर करती है, बल्कि वर्तमान राजनीतिक माहौल में दलित नेता और सामाजिक न्याय के प्रतीक डॉ. अंबेडकर की उपेक्षा को भी सामने लाती है।
घटना का वर्णन
नासिक में गणतंत्र दिवस के सरकारी कार्यक्रम के दौरान मंत्री गिरीश महाजन अपना भाषण दे रहे थे। उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, स्वतंत्रता सेनानियों और अन्य नेताओं का जिक्र किया, लेकिन संविधान सभा के अध्यक्ष और संविधान के मुख्य वास्तुकार डॉ. भीमराव अंबेडकर का नाम गायब था। यह सुनकर माधुरी जाधव, जो वन विभाग में सहायक वन संरक्षक के पद पर कार्यरत हैं, सहन नहीं कर पाईं। उन्होंने भाषण के बीच में ही उठकर पूछा, "आपने डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर का नाम क्यों नहीं लिया? जिन्होंने इस देश का संविधान बनाया, उसी का अपमान हो रहा है!"72c0d2 पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन माधुरी ने साफ कहा कि वह सस्पेंड हो जाएंगी, लेकिन माफी नहीं मांगेंगी। यह दृश्य वीडियो में कैद हो गया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।b0ab91
मंत्री महाजन ने शुरू में इसे नजरअंदाज करने की कोशिश की, लेकिन विवाद बढ़ने पर उन्होंने माफी मांगी। उन्होंने कहा कि अंबेडकर का नाम छूट जाना अनजाने में हुआ था और वह उनका सम्मान करते हैं।a5226c लेकिन क्या यह वाकई अनजाने में था? कई लोग इसे जानबूझकर की गई उपेक्षा मान रहे हैं, खासकर जब वर्तमान सरकार पर अंबेडकर की विरासत को कमतर दिखाने के आरोप लगते रहे हैं।
डॉ. अंबेडकर की भूमिका और संविधान की महत्ता
डॉ. भीमराव अंबेडकर, जिन्हें बाबासाहेब के नाम से जाना जाता है, दलित समुदाय के उत्थान के प्रतीक थे। उन्होंने संविधान सभा की ड्राफ्टिंग कमिटी की अध्यक्षता की और 26 नवंबर 1949 को संविधान को अंतिम रूप दिया। 26 जनवरी 1950 को इसे लागू किया गया, जो ब्रिटिश शासन से मुक्ति के बाद भारत की पहली बड़ी उपलब्धि थी। संविधान ने समानता, न्याय, स्वतंत्रता और बंधुत्व के सिद्धांतों पर आधारित एक लोकतांत्रिक गणतंत्र की नींव रखी। अंबेडकर ने कहा था, "संविधान कितना भी अच्छा क्यों न हो, अगर उसे लागू करने वाले बुरे हैं तो वह बुरा साबित होगा।" आज की घटना इस बात की याद दिलाती है कि संविधान के मूल्यों को बनाए रखना कितना जरूरी है।
लेकिन दुख की बात है कि पिछले कुछ वर्षों में अंबेडकर की छवि को राजनीतिक रूप से हाशिए पर धकेलने के प्रयास दिखे हैं। चाहे वह इतिहास की किताबों में बदलाव हो या सार्वजनिक भाषणों में उनकी अनदेखी, यह पैटर्न चिंताजनक है। 2026 के इस गणतंत्र दिवस पर हुई घटना इसी का एक उदाहरण है, जहां एक मंत्री ने संविधान दिवस पर उसके निर्माता को ही भुला दिया।
विवाद का विस्तार और प्रतिक्रियाएं
माधुरी जाधव की बहादुरी ने पूरे देश में चर्चा छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर #JusticeForAmbedkar और #StandWithMadhuri जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। विपक्षी पार्टियों ने इसे भाजपा सरकार की दलित-विरोधी मानसिकता का सबूत बताया। कांग्रेस नेता ने कहा कि "यह संविधान का अपमान है, जो अंबेडकर की आत्मा को ठेस पहुंचाता है।"cbcc45 वहीं, सामाजिक कार्यकर्ताओं ने माधुरी को सलाम किया, कहते हुए कि महिलाओं की आवाज को दबाना आसान नहीं है।
मंत्री महाजन की माफी के बावजूद, कई लोग इसे नाकाफी मानते हैं। एक रिपोर्ट में कहा गया कि यह घटना नासिक में तनाव पैदा कर सकती है, जहां अंबेडकर की बड़ी अनुयायी आबादी है।5ec05a पुलिस ने माधुरी को हिरासत में लेने की कोशिश की, लेकिन बाद में छोड़ दिया गया। अब सवाल यह है कि क्या उन्हें सस्पेंड किया जाएगा? माधुरी ने स्पष्ट कहा, "मुझे सस्पेंड कर दो, लेकिन मैं सच्चाई से पीछे नहीं हटूंगी।"
यह विवाद गणतंत्र दिवस की भावना के विपरीत है। जहां पूरा देश झंडा फहराकर संविधान का जश्न मना रहा था, वहीं महाराष्ट्र में उसका अपमान हो रहा था। यूरोपीय संघ की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भारत के गणतंत्र दिवस पर कहा कि "एक सफल भारत दुनिया को अधिक स्थिर बनाता है," लेकिन क्या हम आंतरिक रूप से स्थिर हैं जब संविधान के रक्षक ही उसका सम्मान नहीं करते?26fd0f
ब्रॉडर इम्प्लिकेशन्स: अपमान की राजनीति
यह घटना अकेली नहीं है। अंबेडकर ने 1940 के दशक में चेतावनी दी थी कि "राजनीतिक लोकतंत्र तब तक सफल नहीं होगा जब तक सामाजिक लोकतंत्र न हो।" आज, 77 साल बाद भी उनकी चेतावनी प्रासंगिक है।28b970 वर्तमान सरकार पर आरोप है कि वह अंबेडकर की विरासत को कमजोर कर रही है - चाहे वह आरक्षण नीतियों में बदलाव हो या इतिहास की पुनर्लेखन। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने भी गणतंत्र दिवस पर कहा कि "संविधान को कमजोर करने की साजिश हो रही है, हमें इसे बचाना होगा।"44c0fd
हम भारतीयों के रूप में, हमें इस पर शर्म आनी चाहिए। जिस झंडे के नीचे हम खड़े होकर राष्ट्रगान गाते हैं, वह संविधान की देन है। अंबेडकर जैसे महान पुरुष का अपमान पूरे राष्ट्र का अपमान है। यह समय है कि हम जागें और ऐसे नेताओं को जवाबदेह बनाएं जो इतिहास को मिटाने की कोशिश करते हैं।
निष्कर्ष
माधुरी जाधव की तरह की बहादुर आवाजें हमें याद दिलाती हैं कि संविधान जीवित है, क्योंकि लोग उसके लिए लड़ रहे हैं। गणतंत्र दिवस 2026 का यह विवाद एक सबक है - सम्मान की कमी को बर्दाश्त न करें। डॉ. अंबेडकर की जय हो, और भारत का संविधान अमर रहे। हमें डूब मरना चाहिए अगर हम ऐसे अपमान को चुपचाप देखते रहें। यह समय है कार्रवाई का, न कि सिर्फ जश्न का।
