रिपोर्ट भरतसिंह आर ठाकोर अरवल्ली गुजरात
टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत अरावली जिले के सिसोदरा (मेघई) में जन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया
गवर्नमेंट सिविल एंड कमर्शियल कॉलेज, मेघरज के एनएसएस विभाग और जिला क्षय रोग केंद्र, मोडासा की संयुक्त पहल पर अरावली जिले के मेघरज तालुका के सिसोदरा (मेघई) स्थित एक प्राथमिक विद्यालय में 'टीबी मुक्त भारत अभियान' के तहत एक जन जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।इस कार्यक्रम के तहत टीबी रोग के निदान, जांच और उपचार के साथ-साथ कुष्ठ रोग, एचआईवी/एड्स और गैर-संचारी रोगों से जुड़े लाभों पर व्यापक जानकारी दी गई। कार्यक्रम में एनएसएस के विद्यार्थियों के साथ-साथ स्कूली विद्यार्थियों को भी स्वास्थ्य संबंधी मार्गदर्शन दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान टीबी के मुख्य लक्षणों, समय पर निदान के महत्व, नियमित उपचार से टीबी को पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है, के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। इस तथ्य के बारे में भी विशेष जागरूकता फैलाई गई कि टीबी रोग संक्रामक है लेकिन शीघ्र पता लगाने और उचित उपचार के माध्यम से इसे प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है। टीबी एक वायुजनित बीमारी है जिसके लक्षणों में दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी, शाम को हल्का बुखार, रात को पसीना आना, भूख न लगना, वजन कम होना, बलगम में खून आना आदि शामिल हैं। यदि ऐसे लक्षण पाए जाते हैं, तो निकटतम सरकारी अस्पताल में तत्काल निदान का अनुरोध किया गया था। चूँकि टीबी का इलाज लम्बे समय तक चलता है, इसलिए यह नितांत आवश्यक है कि मरीज को आर्थिक सहायता के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक सहायता भी मिले। सरकार द्वारा राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के तहत मिलने वाली नि:शुल्क जांच एवं इलाज की सुविधा के साथ-साथ टीबी मरीजों को 200 रुपये मासिक पोषण योजना भी दी जाती है। 1000/- की पोषण सहायता के बारे में भी बताया गया।जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ.आशीष नायक के मार्गदर्शन में जिला पीपीएम समन्वयक नीलम नई, आईसीटीसी काउंसलर अल्पाबेन पंड्या एवं सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी महिपाल सिंह पुवार ने विद्यार्थियों को मार्गदर्शन प्रदान किया। इस अवसर पर कार्यक्रम अधिकारी श्री प्रो.एच.वी. पटेल,श्रीमती धाराबेन,आर.डी. पटेल और डॉ. शेख उपस्थित थे और उन्होंने इस अवसर पर छात्रों को संबोधित करते हुए जानकारी दी। पूरे कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लोगों को विभिन्न स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं और कार्यक्रमों के लाभों के बारे में जागरूक करना और 'टीबी मुक्त भारत' के लक्ष्य को साकार करने के लिए टीबी के बारे में जन जागरूकता फैलाना था।

