लोकेशन बोकारो से नेशनल हेड एवं लीगल एडवाइजर अधिवक्ता राजेश कुमार की विशेष रिपोर्ट
एंकर बोकारो सत्र एवं प्रधान न्यायाधीश अनिल कुमार मिश्रा के द्वारा सुनाई उम्र कैद की सजा। यह एक बहुत ही गंभीर और दुखद घटना है, जिसमें एक छोटा-सा सड़क विवाद (road rage) इतनी हिंसक रूप ले लिया कि एक युवक की जान खतरे में पड़ गई। बोकारो की प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार मिश्रा की अदालत ने मोहम्मद इब्राहिम (22) और मुजम्मिल (23) को हत्या के प्रयास (attempt to murder) का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही, प्रत्येक पर 1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है, और जुर्माना न चुकाने पर अतिरिक्त एक साल का कारावास।यह फैसला घटना के मात्र 1 साल 3 महीने में आया है, जो झारखंड की न्याय व्यवस्था की तेजी और सख्ती को दिखाता है। यह सड़क पर बढ़ते रोड रेज मामलों के लिए एक मजबूत संदेश है कि छोटी-छोटी बातों पर चाकू या हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
घटना का संक्षिप्त विवरण
तारीख: 5 अक्टूबर 2024
स्थान: बोकारो के माराफारी थाना क्षेत्र, आजाद नगर
पीड़ित: 20 वर्षीय अंकित कुमार (आजाद नगर निवासी), जो अपने दोस्त सोनू के साथ बाइक पर थे।
शुरुआत: मुजम्मिल की तेज बाइक से अंकित की बाइक को टक्कर लगने के करीब आ गई। अंकित ने सुरक्षित चलने की सलाह दी, जिस पर मुजम्मिल भड़क गया और गाली-गलौज शुरू हो गई।
हिंसा: मुजम्मिल ने अपने साथी इब्राहिम को बुलाया और दोनों ने मिलकर अंकित पर चाकू से हमला कर दिया। हमला राशन दुकान के पास हुआ, जहां अंकित को गंभीर रूप से घायल कर छोड़ दिया गया।
परिणाम: अंकित को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी जान खतरे में थी। उसके भाई दीपक कुमार ने माराफारी थाने में FIR दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपियों को जल्दी गिरफ्तार किया। इलाके में भारी आक्रोश फैला और लोगों ने थाने का घेराव भी किया।
अदालत में फैसला
केस नंबर: ST404/2024
अभियोजन पक्ष: अपर लोक अभियोजक रविशंकर चौधरी के नेतृत्व में मजबूत साक्ष्य पेश किए गए, जैसे चश्मदीद गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट आदि।
धारा: मुख्य रूप से भारतीय न्याय संहिता (BNS) की हत्या के प्रयास वाली धाराएं लागू हुईं।
न्यायाधीश का टिप्पणी: घटना की क्रूरता और बिना उकसावे के चाकू का इस्तेमाल को आधार बनाते हुए कहा गया कि ऐसी हिंसा समाज के लिए खतरनाक है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
समाज पर संदेश
झारखंड में रोड रेज से जुड़े हिंसक मामले बढ़ रहे हैं, जहां छोटी बातों पर चाकू-बंदूक चलने लगती है। यह फैसला एक मिसाल है कि कानून ऐसे अपराधियों के साथ कोई नरमी नहीं बरतेगा।
यह हमें याद दिलाता है कि सड़क पर धैर्य और संयम कितना जरूरी है। एक छोटी सी टक्कर या सलाह ने दो युवकों की जिंदगी बर्बाद कर दी और एक परिवार को सदमा पहुंचाया।
पीड़ित परिवार को न्याय मिलने से कुछ राहत जरूर मिली होगी। लेकिन समाज को सोचना चाहिए कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं। पुलिस और प्रशासन को ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई जारी रखनी चाहिए।
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