लोकेशन बोकारो से TTN24 नेशनल न्यूज़ चैनल के नेशनल ब्यूरो हेड एवं लीगल एडवाइजर अधिवक्ता राजेश कुमार की विशेष रिपोर्ट।
एंकर बोकारो सिविल कोर्ट में एक महत्वपूर्ण और साहसिक फैसला सुनाया गया है, जो बाल यौन शोषण के खिलाफ न्याय व्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है। एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज थर्ड-सह- स्पेशल जज POCSO एक्ट, श्री देवेश कुमार त्रिपाठी ने POCSO केस नंबर 2025 में अभियुक्त भोला कालिंदी (पिता धनु कालिंदी का पुत्र) को आजीवन कारावास की कठोर सजा सुनाई है।यह मामला चंदनकियारी थाना क्षेत्र के बरमसिया ओपी थाना अंतर्गत की घटना से जुड़ा है। सूचक (पीड़िता के पिता) ने 16 नवंबर 2024 को बरमसिया थाने में FIR दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि उनकी 15 वर्षीय बेटी (काल्पनिक नाम: सविता कुमारी) को अभियुक्त भोला कालिंदी ने शादी का झांसा देकर बहकाया, उसके साथ बार-बार बलात्कार किया। जब लड़की गर्भवती हो गई, तो उसने माता-पिता को पूरी घटना बताई। अभियुक्त ने गर्भावस्था के बाद भागने की कोशिश की। लड़की के पिता ने अभियुक्त के पिता से बात की और जाति एक होने के कारण शादी का प्रस्ताव रखा, लेकिन अभियुक्त के पिता ने मना कर दिया और लड़के को कहीं और भगा दिया। इसके बाद परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज की।
केस की सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष की ओर से सरकारी वकील श्री रवि कुमार चौधरी ने मजबूती से पैरवी की। उन्होंने कुल 12 गवाहों को कोर्ट में पेश किया और सबूतों के जरिए मामले को पूरी तरह साबित कर दिया। बचाव पक्ष के वकील अपनी दलीलों में अभियोजन के केस को झूठा साबित नहीं कर पाए। जांच अधिकारी ने भी निष्पक्ष और प्रभावी जांच की, जिसके कारण मजबूत चार्जशीट तैयार हुई।
श्री देवेश कुमार त्रिपाठी ने सभी तथ्यों, गवाहों के बयानों और सबूतों पर विचार करने के बाद घटना को सत्य मानते हुए अभियुक्त को POCSO एक्ट के प्रावधानों के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई। यह फैसला न केवल पीड़िता को न्याय दिलाने वाला है, बल्कि समाज में एक सकारात्मक संदेश भी देता है कि बाल यौन अपराधों में कोई भी दोषी बख्शा नहीं जाएगा।
यह फैसला बोकारो कोर्ट की लगातार सक्रियता और न्याय के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। ऐसे मामलों में ईमानदार सरकारी वकीलों, जांच अधिकारियों और न्यायाधीशों की भूमिका सराहनीय है, जो साबित करते हैं कि व्यवस्था में अभी भी कर्तव्यनिष्ठ लोग मौजूद हैं जो अपराधियों को सजा दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ते।
इस सजा से समाज में यह संदेश जाएगा कि नाबालिगों के साथ छेड़छाड़ या बलात्कार जैसे अपराधों में कठोरतम सजा तय है। पीड़ित परिवार को न्याय मिलना न्यायपालिका की जीत है और ऐसे फैसलों से अपराध दर में कमी लाने में मदद मिलेगी।
