ब्युरोचीफ शैलेन्द्रसिंह बारडोली गुजरात
तापी जिले में, एक व्यक्ति को दुग्ध संघ की ऑडिट रिपोर्ट के बदले लेखापरीक्षक की ओर से 15,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया।
दूध मंडली की ऑडिट रिपोर्ट क्लीन चिट के बावजूद, ऑडिटर और बिचौलिए ने गिरोह बनाकर रिश्वतखोरी में 15,000 रुपयेकी मांग। भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो में दूध कंपनी का ऑडिट करने आए ऑडिटर ने खुद एसीबी की जाल में फंसकर तीसरे पक्ष से 15,000 रुपये की रिश्वत लेते पकड़े गए जिससे तापी जिले के भ्रष्ट अधिकारियों में हलचल मच गई।सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, रिश्वत के आरोपमे पकड़ागया वह सूरत के नानपुरा स्थित विशेष लेखा परीक्षक (दूध) कार्यालय में लेखा परीक्षक श्रेणी-2 अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं।
ऑडिटर धर्मेश कुमार रतिलाल वासावा ने वर्ष 2024-2025 के लिए ग्राम दुग्ध संघ का वित्तीय लेखापरीक्षा किया। उन्होंने लेखापरीक्षा में कोई त्रुटि न होने की बात कहते हुए क्लीन चिट रिपोर्ट देने के लिए रिश्वत मांगी।
धर्मेश कुमार ने 15,000 रुपये की रिश्वत मांगी ओर देनेकी बात पक्की करके जिससे रिश्वत मांगी गईथी वो शिकायतकर्ता ने एसीबी से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई। यह जाल ऑडिटर धर्मेश की ओर से रिश्वत ले रहे जेतल कुमार को पकड़े जाने से रोकने के लिए बिछाया गया था।शिकायत के आधार पर, एसीबी अफसरने तापी जिले के व्यारा तालुका के उचामाला में स्थित इंडियन पेट्रोल पंप के सामने एक सार्वजनिक सड़क पर रिश्वत लेनेवाला जेतल गामीत को रंगे हाथों पकड़ लिया। जैसे ही इस सफल जाल की खबर फैली, यह चर्चा होने लगी कि कुछ भ्रष्ट अधिकारी अपने कार्यालय के दफ्तर छोड़कर भाग निकले थे।
जांच में बिछाए गए जाल के अनुसार, ऑडिटर धर्मेश कुमार वसावा ने शिकायतकर्ता से बात की और ऑडिटर के बिचौलिए जेतल कुमार सुजीतभाई गामित को पंद्रह हजार रुपये की रिश्वत देने पर सहमति जताई।
योजना के अनुसार, आज ऑडिटर की ओर से रिश्वत लेते समय वाउचर को पकड़लिया गया। एसीबी टीम ने दोनों को पकड़ के रिश्वतखोरी के आरोपमे विभिन्न धाराओं के तहत आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की। दोनों आरोपियों के जेल जाने की घटना से सरकारी कार्यालयों में, विशेषकर भूस्तर और कलेक्टर कार्यालयों के उन कर्मचारियों में हलचल मच गई है जो भ्रष्टाचार की आदत के कारण भ्रष्टाचार करने पर मजबूर होके घूमते है।
