ब्युरोचीफ शैलेन्द्रसिंह बारडोली गुजरात
सूरत के कामरेज तालुका क्षेत्र में अधिकारियों और रेत माफिया का तापी नदी के तल से अनियंत्रित रेत खनन का खुल्ला खेल ।
भूविज्ञान सर्वेक्षण अधिकारी की एकही अनुमति परची से, दिनभर ट्रकोंके चक्कर चलने से सरकारी खजाने पर शीघ्र करोड़ों का बोझ।
दर्शन नायक ने सरकार से कहा, तत्काल प्रभाव से जांच शुरू करें और जिम्मेदार अधिकारियों और रेत माफिया के खिलाफ कार्रवाई करें।
दर्शन नायक ने स्थानीय नेताओं और किसानों द्वारा दी गई शिकायतों के आधार पर सूरत जिले के कामरेज तालुका के डूंगरा, धतवा और जियोर गांवों में तापी नदी से रेत के अवैध खनन पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।किसानों द्वारा दी गई शिकायतों के अनुसार, कामरेज तालुका के डूंगरा और धतवा गांवों में रॉयल्टी का भुगतान करके तापी नदी से रेत खनन की अनुमति प्राप्त की गई है। हालांकि, अनुमति के अनुसार रॉयल्टी राशि से अधिक हजारों टन रेत का अवैध रूप से खनन और बिक्री की जा रही है। इस प्रकार, अनुमति की शर्तों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है, जिससे सरकारी राजस्व को नुकसान हो रहा है।
इसके अलावा, कामरेज तालुका के जेयोर गांव में तापी नदी से प्रशासन की अनुमति के बिना और रॉयल्टी का भुगतान किए बिना अवैध रूप से रेत का खनन और बिक्री की जा रही है। इन सभी गांवों में रेत खनन के लिए पर्यावरण मंजूरी नहीं ली गई है, जो पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 का स्पष्ट उल्लंघन है।इसके अलावा, रेत माफियाओं द्वारा अधिकांश ट्रकों में ज़रूरत से ज़्यादा रेत भरकर लादा जा रहा है। कामरेज तालुका के उपर्युक्त गांवों में सरकारी नीतियों और नियमों का उल्लंघन करते हुए अवैध रेत खनन से कई समस्याएं पैदा हो रही हैं। सूरत जिले के कामरेज तालुका के तापी तटवर्ती गांवों में रेत माफिया पानी के नीचे की रेत का खनन कर रहे हैं, जिससे पर्यावरण और नदी के प्रवाह को नुकसान पहुंच रहा है।
इसके साथ ही, नदी तट के कटाव के कारण तटीय क्षेत्र में रहने वाले किसानों ने सरकार से अपनी फसलों को हुए नुकसान की शिकायत की है। सरकार से बार-बार शिकायत करने के बावजूद, बेलगाम रेत माफिया सरकार के दामाद ऐसे अफसरों की नजरों में खनिज माफियाओं का स्वर्ग बन गया है। तापी नदी क्षेत्र अब खनिज माफियाओं का अड्डा बन चुका है।कामरेज तालुका के गांवों में राजकोषीय कर की चोरी हो रही है, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है दुसरी ओर सरकारके अफसरों के घरोकी तिजोरी भरी जाती है फिरभी राम राज्य ओर जनता खुश जैसी बात।
खान, खनिज और भूविज्ञान विभाग का प्रशासन और अधिकारी इस मामले को नजरअंदाज नहीं कर रहे हैं, जिससे भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा होती हैं।
जागरूक नागरिकों द्वारा शिकायतें किए जाने पर, सूचित किए जाने के बावजूद संबंधित अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जाती है और एजेंसियों को खामी का फायदा मिलता है। सरकारी नीति और नियमों (गुजरात खनिज नियम, 2017 और पर्यावरण नियम) के अनुसार, रेत खनन कार्य केवल अधिकारियों की देखरेख और अनुमोदन के तहत ही किया जाना चाहिए।
हालांकि, उपर्युक्त गांवों में सरकारी नीतियों, नियमों और प्रस्तावों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था के कामकाज पर सवाल उठते हैं।
दर्शन नायक ने उठाए गए मुद्दों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। इनमें शामिल हैं: 1. यदि तापी नदी ब्लॉक में, गांवों में रॉयल्टी का भुगतान करके स्वीकृत रेत खनन, अनुमत सीमा से अधिक किया गया है, तो इसे तत्काल प्रभाव से रोकने का आदेश दिया जाए। 2. इस मामले में तत्काल प्रभाव से निष्पक्ष जांच कराई जाए और जिम्मेदार अधिकारियों और रेत माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। 3. सूरत जिले के कामरेज तालुका के उपर्युक्त गांवों में रेत खनन का विवरण (किस गांव में, किस स्थान पर, कितनी गहराई से) दर्ज किया जाए, अवैध खनन और रॉयल्टी की राशि का आकलन करके सरकारी खजाने में जमा किया जाए। 4. भविष्य में इस तरह के उल्लंघन को रोकने के लिए तापी नदी में कड़ी निगरानी और गश्त की व्यवस्था की जाए और स्थानीय किसानों और पर्यावरण के हित में तत्काल प्रभाव से उचित कार्रवाई करनेकी मांग की गई।

