ब्युरोचीफ, शैलेन्द्रसिंह बारडोली गुजरात
बाढ़ का पानी कम होने के बाद हालात का जायज़ा लेने निकले नेता और अधिकारी जख्म पर नमक छिड़कने निकले: दर्शन नायक।
बाढ़ के पानी में परेशान हुए स्थानीय लोगों ने नेताओं और अधिकारियों को कीचड़ मे चलनेको मजबुर किया।लगातार दो दिन की बेमौसम बारिश ने नेताओं और नगर निगम के हुक्मरानों और अधिकारियों के किए गए घोटालों को कुदरत ने नहीं, बल्कि खुद ही सामने ला दिया है। एक तरफ तो वे आम गरीब परिवारों को मानसून में बेघर करने का अपना बुरा इरादा नहीं छोड़ते।
आज BJP नेताओं और नगर निगम अधिकारियों समेत नगर निगम के कर्मचारियों ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया, जहां लोगों को नावों में शरण लेनी पड़ी। उस समय हालात का जायज़ा लेने के लिए एक भी नेता मौके पर नहीं पहुंचा। बाढ़ का पानी कम होने के बाद टहलने निकले नेताओं और अधिकारियों को जनता ने धक्के चढ़ाकर कीचड़ में चलने को मजबुर किया तब तक स्थानीय जनता का आक्रोश था।
ट्रैक्टर में आए नेताओं के खिलाफ जनता ने अपना गुस्सा निकाला उन्हें हालात का जायज़ा लेने के लिए बाढ़ के पानी में चलने के लिए मजबूर होना पड़ा और नेताओं को पैदल चलना पड़ा।सालों से सूरत में शहर के लोग मानसून में थोड़ी सी बारिश में बाढ़ जैसे हालात का सामना कर रहे हैं। जब सूरत की तस्वीर खराब हुई तो एक बार फिर शुरुआती बारिश में सड़कें नदियों में बदल गईं। घरों में पानी घुस गया। किसानों की फसलें डूब गईं। व्यापारियों का बिजनेस ठप हो गया। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ भारी बारिश का नतीजा है?।
गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी के जनरल सेक्रेटरी और किसान नेता दर्शन नायक का दावा है कि पिछले तीन सालों से वह लगातार सरकार को चेतावनी दे रहे हैं। नदियों और खाड़ियों को साफ करो, बारिश के पानी की निकासी का सिस्टम सुधारो, तापी नदी के किनारों पर गैर-कानूनी कब्जे हटाओ, लेकिन प्रशासन ने समय पर कोई असरदार कदम नहीं उठाया।
आज पूरा सूरत इसका नतीजा भुगत रहा है। लाखों नागरिक पानी में डूब गए, किसानों की फसलें बुरी तरह खराब हो गईं, व्यापारियों को करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा और आम आदमी मुश्किल में पड़ गया। दर्शन नायक ने गुस्से में कहा कि जिला प्रशासन, डिजास्टर मैनेजमेंट डिपार्टमेंट, सिंचाई डिपार्टमेंट और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। और उन्होंने सरकार के सामने इंसानों की बनाई बाढ़ के मुद्दे पर पूरी घटना की हाई-लेवल जांच करवाने की मांग की है, साथ ही गैर-कानूनी दबाव हटाकर प्रभावित लोगों को सही मुआवजा दिलाने की मांग की है।हर साल सूरत को डुबोने और फिर कुदरत को दोष देने का बयानबाजी का खेल अब नहीं चलेगा। जनता के आंसुओं का हिसाब लिया जाएगा। हर लापरवाह अधिकारी और जिम्मेदार सरकार को जवाबदेह ठहराना होगा। यह लड़ाई सिर्फ पानी की नहीं, बल्कि जिम्मेदारी, न्याय और सूरत के भविष्य की है। जनता की आवाज अब कभी दबी नहीं जाएगी, जनता की बर्दाश्त की हद हो गई है और यह साफ हो गया है कि जनता अभी भी सरकार के तानाशाही राज से परेशान है, जो BJP पार्टी के पानी पसंद नेताओं के पापों के कारण सालों से पानी की समस्या पैदा कर रही है, दर्शन नायक ने कहा।

