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ढीमरखेड़ा: मध्य प्रदेश जिला कटनी ढीमरखेड़ा से नहीं छूट रहा मोह, स्थानांतरण के बाद भी जमे हैं जनपद सीईओ यजुवेंद्र कोरी, नियमों को ठेंगा दिखा रही ‘कुर्सी की चाह

 मध्य प्रदेश जिला कटनी ढीमरखेड़ा से नहीं छूट रहा मोह, स्थानांतरण के बाद भी जमे हैं जनपद सीईओ यजुवेंद्र कोरी, नियमों को ठेंगा दिखा रही ‘कुर्सी की चाह’

ब्यूरो रिपोर्ट TTN 24 NEWS 

ढीमरखेड़ा । सरकारी सेवा में स्थानांतरण एक सामान्य और अनिवार्य प्रक्रिया है। नियम कहते हैं कि जैसे ही किसी शासकीय अधिकारी या कर्मचारी का स्थानांतरण आदेश जारी होता है, उसे अविलंब अपने वर्तमान पद से कार्यमुक्त होकर नवीन पदस्थापना स्थल पर पहुंचकर पदभार ग्रहण करना चाहिए। लेकिन कटनी जिले के ढीमरखेड़ा जनपद पंचायत में इन दिनों प्रशासनिक नियमों और लोक सेवा की मर्यादाओं को ताक पर रखने का एक अनोखा मामला सामने आ रहा है। ढीमरखेड़ा जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) यजुवेंद्र कोरी का स्थानांतरण छतरपुर के लिए हो चुका है । सरकार की ओर से आदेश जारी हुए अच्छा-खासा समय बीत चुका है, लेकिन मजाल है कि साहब अपनी कुर्सी छोड़ने को तैयार हों। आलम यह है कि छतरपुर में उनकी प्रतीक्षा हो रही है और ढीमरखेड़ा से उनका ‘मोह’ खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है। इस स्थिति ने अब क्षेत्र में चर्चाओं और कयासों का बाजार गर्म कर दिया है। शासन के प्रशासनिक फेरबदल के तहत ढीमरखेड़ा जनपद सीईओ यजुवेंद्र कोरी का तबादला छतरपुर में कर दिया गया था।नियम और शासकीय सेवाशर्तों के मुताबिक, आदेश जारी होने के तत्काल बाद उन्हें ढीमरखेड़ा का प्रभार सौंपकर छतरपुर के लिए रवाना हो जाना चाहिए था। परंतु, आदेश के हफ्तों बाद भी श्री कोरी ढीमरखेड़ा जनपद कार्यालय में ही जमे हुए हैं और दैनिक शासकीय कार्यों का संचालन कर रहे हैं। अधिकारी का इस कदर एक ही जगह पर टिके रहना प्रशासनिक हलकों में कई सवाल खड़े कर रहा है।आखिर ऐसी क्या मजबूरी या ऐसा क्या विशेष आकर्षण है कि छतरपुर जैसे बड़े जिले में जाने की बजाय साहब ढीमरखेड़ा की माटी और यहाँ की प्रशासनिक कुर्सी से चिपके रहना चाहते हैं?

*जो एक बार आता है, वह जाने का नाम नहीं लेता*

ढीमरखेड़ा जनपद के इतिहास और यहाँ के प्रशासनिक गलियारों में यह बात अब एक मुहावरे की तरह तैरने लगी है कि जो अधिकारी एक बार ढीमरखेड़ा आ जाता है, उसका यहाँ से जाने का मन नहीं करता । स्थानीय लोगों और राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो ढीमरखेड़ा जनपद क्षेत्र भौगोलिक और प्रशासनिक रूप से बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण माना जाता है। यहाँ विभिन्न शासकीय योजनाओं, निर्माण कार्यों और विकास परियोजनाओं के लिए भारी-भरकम बजट आवंटित होता है। जानकारों का कहना है कि इसी ‘बजट के जादू’ और 'विशेष सुख-सुविधाओं' के कारण यहाँ आने वाले अधिकारियों को इस क्षेत्र से गहरा लगाव हो जाता है। जब तबादले की गाज गिरती है, तो अधिकारी नियमों का पालन करने के बजाय उसे टालने या रोकने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाने लगते हैं। यजुवेंद्र कोरी का मामला भी इसी कथित 'ढीमरखेड़ा सिंड्रोम' का हिस्सा नजर आ रहा है।

*नियमों की सरेआम धज्जियां*

मध्य प्रदेश सिविल सेवा आचरण नियमों के तहत, किसी भी लोक सेवक को स्थानांतरण आदेश मिलने के बाद निर्धारित समय-सीमा (जॉइनिंग टाइम) के भीतर नवीन पद पर उपस्थिति दर्ज करानी होती है।यदि कोई अधिकारी बिना किसी ठोस, वैध या चिकित्सकीय कारण के पुराने पद पर डटा रहता है, तो इसे अनुशासनहीनता और वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना माना जाता है। जब सरकार ने स्थानांतरण आदेश जारी कर दिया है, तो सीईओ यजुवेंद्र कोरी किस अधिकार से अभी भी ढीमरखेड़ा में वित्तीय और प्रशासनिक निर्णय ले रहे हैं? क्या उन्हें वरिष्ठ अधिकारियों या किसी राजनैतिक रसूख का संरक्षण प्राप्त है, जिसके बल पर वे स्थानांतरण को ठंडे बस्ते में डाले हुए हैं?

*विकास कार्य और आम जनता प्रभावित*

अधिकारी के इस रवैये का सीधा असर ढीमरखेड़ा जनपद के विकास कार्यों और आम जनता पर पड़ रहा है। जब किसी अधिकारी का तबादला हो जाता है, तो उसकी मानसिक स्थिति और कार्यशैली में ‘अस्थिरता’ आ जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों के विकास, प्रधानमंत्री आवास योजना, मनरेगा और स्वच्छता मिशन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण फाइलें अधर में लटकी हुई हैं।

*क्या इसके पीछे कोई राजनैतिक सांठगांठ है*

ढीमरखेड़ा के राजनैतिक गलियारों में इस बात की भी पुरजोर चर्चा है कि सीईओ साहब अपने इस तबादले को रुकवाने या इसे निरस्त करवाने के लिए भोपाल स्तर पर लॉबिंग कर रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि कुछ स्थानीय रसूखदार नेताओं और ठेकेदारों का भी उन्हें मूक समर्थन हासिल है, जो नहीं चाहते कि वर्तमान वित्तीय वर्ष के बीच में कोई नया अधिकारी आए और उनके समीकरण बिगड़ें। यही कारण है कि आदेश होने के बाद भी 'कार्यमुक्ति' (रिलीविंग) की प्रक्रिया को जानबूझकर लटकाया जा रहा है।

*छतरपुर में इंतजार, ढीमरखेड़ा में कड़ा पहरा*

एक तरफ जहां छतरपुर जनपद और वहां के जिला प्रशासन को नए सीईओ की जॉइनिंग का इंतजार है, ताकि वहां के रुके हुए काम गति पकड़ सकें, वहीं दूसरी तरफ ढीमरखेड़ा में यजुवेंद्र कोरी अपनी कुर्सी को महफूज रखने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। आम जनता का कहना है कि यदि अधिकारी नियमों का पालन नहीं करेंगे, तो वे समाज और अपने मातहत कर्मचारियों को क्या संदेश देंगे?, रिपोर्टर सत्येंद्र बर्मन

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