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बारडोली गुजरात: गुजरात का किसानों सरकार के खिलाफ नहीं है, लेकिन भाजपा की किसान विरोधी पॉलिसी के खिलाफ है: दर्शन नायक

 TTN 24न्यूज 

ब्युरोचीफ, शैलेन्द्रसिंह बारडोली गुजरात 



गुजरात का किसानों सरकार के खिलाफ नहीं है, लेकिन भाजपा की किसान विरोधी पॉलिसी के खिलाफ है: दर्शन नायक

गुजरात की भाजपा सरकार किसानों को बर्बाद करके अडानी जैसे उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाकर क्या हासिल करना चाहती है?।


किसान, जिसे पूरे देश का कमाने वाला माना जाता है, जो अपने खेतों में दिन-रात मेहनत करके अनाज उगाता है और दुनिया के जीवोंकी तृप्ति करता है, उसकी हालत आज दयनीय हो गई है। लेकिन, सरकार अभी अमीर पूंजीपतियों को सीधा फायदा पहुंचाने के लिए किसानों को कालापानी के आंसू रुला रही है। सरकार की हमदर्दी पर क्या असर पड़ सकता है? 


गुजरात के 182 विधायकों जिन्हें जानताने अपने वोटों से गांधीनगरमे जनता के हितकार्यों के लिए शासन की धूरा जानताने उनके हाथ दी फिरभी उनमें से एक भी किसानों के इंसाफ के लिए आगे आकर नहीं कोई किसानों के हितों के लिए समर्थन जताने के लिए मैदान में दिखा। यह सोचना मुश्किल है कि जानता द्वारा चुने गए नुमाइंदों के खिलाफ किसानों का गुस्सा कैसा और कितना होगाये वर्तमान समय मे साफ दिखता है।


सूरत जिले के ओलपाड तालुका से किसानों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ उठी यह आवाज धीरे-धीरे पूरे गुजरात का सबसे उग्र आंदोलन बन रही है, जिसने बीजेपी सरकार के अडानी प्रेम को लेकर आम लोगोमे चर्चा का मंच बना दिया है।


हाई-टेंशन बिजली लाइनों से किसानों को हो रहे नुकसान और अन्याय के खिलाफ किसानों की एकता, कीमती खेत की जमीनों से पानी का मुआवजा देने की सरकार की बालिश कोशिशें, विज लाइन के विरोध करने वाले खुद खेतो के मालिक अपना विरोध जताते है उस समय भाजपा सरकार के इशारे संविधान में लोगों के रक्षक कहे जाने वाले भाड़े की पुलिस किसानों पर दमन गुजारने वाला खुदका संविधान का इस्तेमाल करके जगत के तात कहे जानेवाले किसानों की आवाज घोटनेकी की सरकार की नीति गुजरात ही नहीं बल्कि पूरे भारत देश में बीजेपी सरकार की किसान विरोधी नीति की कड़ी आलोचना हो रहीहै।



वो न्याय की लड़ाई में किसान नेता दर्शन नायक ने किसानों की ताकतों की लड़ाई को अपना समर्थन देने का ऐलान किया है और किसानों के साथ मिलकर सरकार के सामने हाई-टेंशन बिजली लाइनों के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए किसानों के लिए न्याय, सही मुआवजा और किसानों के अधिकारों की रक्षा की मांग की है।


सालों से किसानों की जमीन से 66 KV से 800 KV तक की हाई-टेंशन ट्रांसमिशन लाइनें गुजर रही हैं। किसानों का कहना है कि इससे ज़मीन की उपयोगिता कम हो रही है, फ़सलों को नुकसान हो रहा है और किसानों को आर्थिक, सामाजिक और मानसिक मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इसके विरोध में 'गुजरात खेडुत समाज' ने ओलपाड में किसानोंने विरोध प्रदर्शित रैली के दौरान किसानों की एक ही मांग रही की ज़मीन अडानी जैसी प्राइवेट कंपनी को अधिग्रहण के हिसाब से मुआवज़ा दिया जाए। अभी गुजरात की बीजेपी सरकार एक प्राइवेट कंपनी को फ़ायदा पहुँचाने के लिए किसानों के ख़िलाफ़ दिखावा, दाम, जुर्माना, भेदभाव की नीति अपना रही है। पुलिस सिस्टम को खुद भाजपा सरकार किसानों पर लाठियां बरसाने किराए पर दिया जा रहा है। किसानों पर हो रहे ज़ुल्म में जगत के तात खुद अडानी को दिएगए किरायेका पुलिस की इजाज़त के बिना अपने खेतों में भी नहीं जा सकते। जब वे विरोध करते हैं, तो बीजेपी की जाबांज पुलिस हमेशा की तरह किसानों को जेल में डालने का वही तरीका अपनाती है। 


किसान समुदाय वर्तमान एक होकर अन्याय के खिलाफ सरकारके सामने छेड़ा अहिंसा का जंगमे पुरे गुजरातके किसान समुदाय का समर्थन मिलरहा है सभी किसान एक तरफ़ा हो गए हैं, उन्हें आख़िरकार गांधीवादी अहिंसा का मार्ग पर आंदोलन का हथियार उठाना पड़ेगा। किसान नेता दर्शन नायक ने सरकार के सामने लिखित साफ़ मांगें रखी हैं।


देश भर में प्रभावित किसानों के लिए एक जैसी और ट्रांसपेरेंट मुआवज़ा पॉलिसी होनी चाहिए, जहाँ तक हो सके, ट्रांसमिशन लाइनों का रूट बदला जाना चाहिए, प्रभावित किसानों को सही फाइनेंशियल मदद और पक्का मुआवज़ा मिलना चाहिए, और जब तक सही पॉलिसी नहीं बन जाती, नई हाई-टेंशन लाइनों का काम रोक देना चाहिए, ऐसी मांग दर्शन नायक ने गुजरात की BJP सरकार से की है।


इसके साथ ही, खेदूत आलम ने कहा कि "हम डेवलपमेंट के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन भाजपा सरकार उन धरतीपुत्रों को मानने को कभी तैयार नहीं है जो किसानों के हकों को रौंदते हैं और इंसाफ की मांग करते हुए, किसानों ने गांधी की तर्ज पर सरकार के मनमाने फतवे के खिलाफ आंदोलन को तेज करने के लिए पहले से ही रणनीति बनाने की चेतावनी दी है।


 जबकि दुनिया बदल रही है और सरकार के मनमाने फैसलों की कीमत पर डेवलपमेंट किसानों को कभी मंजूर नहीं है।" ऐसी एकमत आवाज सुनाई दे रही है। 


जैसे-जैसे सौराष्ट्र के मोरबी के जेतपर पंथक में किसानों का आंदोलन तेज हुआ है तब आनेवाले समय में सुरत जिलाके ओलपाड से उठी यह आवाज सिर्फ एक तालुका की नहीं है, यह इस देश के करोड़ों किसानों की अंतरात्मा की आवाज बनकर भाजपा सरकार सामने सत्ताकी समस्या पैदा कर देने वाली किसानों की लहरें होगी।

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