जल-संरक्षण' से भावी पीढ़ी तृप्त होती है: आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज
"सादर जय सियाराम"
भक्तों के संयोग से सबका मंगल होता है ।
यही तो प्रमाण है कि 'भक्त का संयोग' से केवल 'व्यक्ति' सुधरता , अपितु 'पर्यावरण' सुधरता है , 'समाज' सुधरता है , कहां तक कहें 'युग' सुधरता है ।
यह बात शास्त्र-सम्मत भी है और अनुभव-सिध्द भी ।
"गुरुदेव का प्रत्येक शिष्य पर कृपा बनी रहे संयोग बना रहे ,
हाथ न छूटे , क्योंकि गुरुदेव का संयोग ही 'सीताराम का संयोग' है ।
भक्तों का जो विशेष गुण है वह है 'दीनता' होती है ,
भगवान में दृढ़ विश्वास होता है ,
1-भगवान के प्यारे भक्तों के 'दर्शन' से पाप कट जाते है ।
2-भक्तों के अमृतमय वचन से भ्रम मिटते हैं ।
3- भगवान के प्यारे भक्तों की पावन सानिध्य से स्वभाव सुधरता ,
भक्त स्वयं के लिए नहीं जीता अपितु जगत मंगल के लिए जीता है ।
भक्तों के पर्यावरण-प्रेम से नदी निर्मल होती है ।
उनके 'वृक्षारोपण' से पक्षी बसेरा पाते हैं ।
उनके 'जल-संरक्षण' से भावी पीढ़ी तृप्त होती है ।
वही सच्चा 'विश्व पर्यावरण दिवस' है ।
जिस दिन किसी के जीवन में
'भक्तों का संयोग हो जाए ,
उस दिन 'उसके' अपितु 'सबके' पर्यावरण का मंगल हो जाता है
जब से हमारे जीवन में पूज्य गुरुदेव भगवान का प्रादुरभाव हुआ है तब से जीवन में सब कुछ मंगल ही मंगल हो रहा है ।
[आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज]
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