बीके तिवारी
आठवें वेतन आयोग के समक्ष पेंशनरों की आवाज प्रभावी ढंग से उठायी ।
लखनऊ ।आठवें वेतन आयोग की टीम के प्रस्तावित लखनऊ दौरे के दृष्टिगत पेंशनर संगठनों द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले ज्ञापनों एवं मांगों पर विचार-विमर्श हेतु आयोजित बैठक में वरिष्ठ नागरिक पेंशनर सेवा संस्थान, उत्तर प्रदेश ने पेंशनरों के हितों को मजबूती से उठाया। संस्थान के प्रदेश अध्यक्ष श्री संपूर्णानन्द द्विवेदी ने संस्थान द्वारा पूर्व में आठवें वेतन आयोग को प्रेषित ज्ञापन की प्रति आयोग के नोडल अधिकारी श्री नीलरतन जी को सौंपते हुए पेंशनरों की प्रमुख समस्याओं एवं मांगों से अवगत कराया। साथ ही उन्होंने इस बात पर कड़ा विरोध दर्ज कराया कि प्रदेश के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय रूप से कार्य कर रहे वरिष्ठ नागरिक पेंशनर सेवा संस्थान, उत्तर प्रदेश को उक्त बैठक की सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई।इस पर नोडल अधिकारी श्री नीलरतन जी ने आश्वासन दिया कि संस्थान पेंशनरों के हितों की रक्षा एवं उनके अधिकारों के लिए सकारात्मक और निरंतर संघर्ष कर रहा है। भविष्य में आयोग अथवा शासन स्तर पर आयोजित होने वाली सभी संबंधित बैठकों की सूचना संस्थान को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि इस संबंध में विशेष सचिव, वित्त अनुभाग-2 को लिखित रूप से निर्देश जारी किए गए हैं कि संस्थान द्वारा प्रस्तुत ज्ञापन को अभिलेखों में सम्मिलित किया जाए तथा भविष्य की बैठकों की सूचना नियमित रूप से उपलब्ध कराई जाए। तत्पश्चात संस्थान के अध्यक्ष श्री संपूर्णानन्द द्विवेदी ने विशेष सचिव वित्त श्री पुष्पराज जी से भेंट कर प्रदेश के लाखों पेंशनरों की समस्याओं, अपेक्षाओं एवं पीड़ा से अवगत कराया तथा संस्थान की उपेक्षा पर अपना विरोध दर्ज कराया। श्री पुष्पराज जी ने विषय की गंभीरता को स्वीकार करते हुए संबंधित अधिकारियों एवं सहायकों को निर्देशित किया कि भविष्य में वरिष्ठ नागरिक पेंशनर सेवा संस्थान, उत्तर प्रदेश का विवरण अभिलेखों में अंकित रखा जाए तथा बैठकों एवं विचार-विमर्श कार्यक्रमों की सूचना समय से उपलब्ध कराई जाए। संस्थान ने आशा व्यक्त की है कि आठवां वेतन आयोग पेंशनरों की समस्याओं, पेंशन पुनरीक्षण, समानता के सिद्धांत तथा सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक विचार करेगा और प्रदेश एवं देश के लाखों पेंशनरों को न्याय दिलाने का कार्य करेगाउक्त जानकारी प्रदेश महामत्री बी के तिवारी ने दी ।

