विनोद कुमार पांडे ब्यूरो चीफ
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12 दिन तक न्याय के लिए भटकता रहा पीड़ित, आईजी के हस्तक्षेप के 48 घंटे के भीतर दर्ज हुई FIR
केल्हारी/एमसीबी। यदि 29 मई को ही केल्हारी थाना में पीड़ित कमल नयन तिवारी की शिकायत दर्ज कर ली गई होती तो शायद उन्हें न्याय की तलाश में सरगुजा रेंज पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) दीपक झा तक नहीं जाना पड़ता। लेकिन आरोप है कि शिकायत के बावजूद रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई, बल्कि समझौते का दबाव बनाया गया। अब आईजी के हस्तक्षेप के बाद मामला दर्ज होने से पुलिस कार्यप्रणाली और कानून व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।ग्राम बिछियाटोला निवासी कमल नयन तिवारी का आरोप है कि 29 मई की रात उन्होंने नदी में चल रहे कथित अवैध रेत खनन का वीडियो बनाया था। इसी दौरान कुछ लोगों द्वारा उनके साथ मारपीट की गई, मोबाइल छीन लिया गया तथा जान से मारने की धमकी दी गई। पीड़ित का कहना है कि घटना के तत्काल बाद वह केल्हारी थाना पहुंचे, लेकिन रिपोर्ट दर्ज करने के बजाय उन्हें कहा गया कि समझौता कर लो, कुछ नहीं कर पाओगे।
पीड़ित के अनुसार उनका मोबाइल लगभग 12 दिनों तक थाना में रखा गया। इस दौरान उनके बैंकिंग कार्य, आधार से जुड़े काम, परिवार को आर्थिक सहायता भेजना और दैनिक जीवन के अनेक जरूरी काम प्रभावित हुए। उनका आरोप है कि मोबाइल लौटाते समय कोरे कागज पर हस्ताक्षर करवाए गए और मोबाइल में मौजूद कुछ महत्वपूर्ण फोटो एवं वीडियो भी हटाए गए। आवेदन में उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच तथा कथित रूप से सबूत मिटाने वालों पर भी कार्रवाई की मांग की है।
कमल नयन तिवारी ने आरोप लगाया कि यदि पुलिस समय पर कार्रवाई करती तो उन्हें एसपी कार्यालय, जिला प्रशासन और अन्य अधिकारियों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। कई जगह गुहार लगाने के बाद भी जब न्याय नहीं मिला तो वे अंबिकापुर पहुंचकर सरगुजा रेंज पुलिस महानिरीक्षक दीपक झा से मिले और पूरी घटना की जानकारी दी।
पीड़ित का कहना है कि आईजी दीपक झा ने मामले को गंभीरता से लिया और दो से तीन दिन के भीतर कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद महज 48 घंटे के भीतर पुलिस हरकत में आई और केल्हारी थाना में विस्तृत रिपोर्ट दर्ज की गई। इतना ही नहीं, एमसीबी जिला पुलिस अधीक्षक द्वारा भी लगातार पीड़ित से संपर्क कर मामले की जानकारी ली गई।
मामले ने अवैध रेत खनन के मुद्दे को भी एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नदी में रात के अंधेरे में पोकलेन मशीन, ट्रैक्टर और हाईवा लगाकर बड़े पैमाने पर रेत निकासी की जाती रही है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी के भीतर रास्ते तक बना दिए गए हैं और लंबे समय से यह कारोबार खुलेआम चलता रहा है। क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि खनन गतिविधियों को लेकर कई बार शिकायतें हुईं, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि जब राज्य सरकार द्वारा अवैध खनन की निगरानी के लिए ड्रोन और आधुनिक तकनीक के उपयोग के निर्देश दिए गए हैं तो फिर इस क्षेत्र में निगरानी क्यों नहीं की गई। लोगों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
इस पूरे घटनाक्रम को प्रमुखता से उठाने वाले संवाददाता देवेंद्र सिंह चंदेल (राजपूत) की भूमिका की भी पीड़ित ने सराहना की। कमल नयन तिवारी ने कहा कि प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में लगातार खबरें प्रकाशित और प्रसारित होने के बाद ही प्रशासनिक स्तर पर हलचल बढ़ी और उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद जगी।
पीड़ित ने सरगुजा रेंज पुलिस महानिरीक्षक दीपक झा का विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके हस्तक्षेप के कारण ही मामले में कार्रवाई संभव हो सकी। अब क्षेत्रवासियों की निगाह इस बात पर टिकी है कि दर्ज अपराध में आरोपियों पर क्या कार्रवाई होती है, कथित अवैध रेत खनन की जांच किस दिशा में बढ़ती है तथा शिकायतों की अनदेखी और सबूतों से कथित छेड़छाड़ के आरोपों पर जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होती है या नहीं।
