संवाददाता हितेश कुमार जोशी
12 घंटे की चुनौती, 25 हजार का इनाम और दो शहरों की पुलिस की मेहनत! जयपुर से मिली मूक-बधिर बच्ची
जयपुर में एक मूक-बधिर नाबालिग किशोरी के अचानक घर से लापता होने के बाद परिजनों की चिंता, उस समय राहत में बदली, जब झालावाड़ और जयपुर पुलिस के संयुक्त प्रयासों से महज 12 घंटे के भीतर उसे जयपुर से सकुशल खोज लिया गया. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया और तकनीकी संसाधनों के साथ-साथ फील्ड इंटेलिजेंस का प्रभावी उपयोग करते हुए ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया बिना बताए किसी के घर चली गई थी मूक-बधिर किशोरी जिला पुलिस अधीक्षक झालावाड़ अमित कुमार ने बताया कि 20 जून को कोतवाली थाने में सूचना मिली कि झालावाड़ शहर की 17 वर्षीय मूक-बधिर किशोरी बिना किसी को बताए घर से चली गई है. जन्म से बोलने और सुनने में असमर्थ होने के कारण उसके साथ किसी अनहोनी की आशंका को देखते हुए पुलिस ने इसे अत्यंत संवेदनशील मामला मानते हुए तत्काल अपहरण का प्रकरण दर्ज किया और विशेष टीमों का गठन कर तलाश शुरू कर दी. मोबाइल की लोकेशन ट्रेस किशोरी को ढूंढा गया जयपूर से पुलिस ने एक साथ कई स्तरों पर कार्रवाई करते हुए आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली, सादा वेश में सूचना तंत्र सक्रिय किया और किशोरी के मोबाइल फोन की लोकेशन ट्रेस की. तकनीकी विश्लेषण में लोकेशन जयपुर की मिलने पर तुरंत पुलिस आयुक्तालय जयपुर से संपर्क किया. इसके बाद झालावाड़ और जयपुर पुलिस की संयुक्त टीम ने समन्वित अभियान चलाकर किशोरी को जयपुर से सुरक्षित ढूंढ लिया गया. इस पूरे ऑपरेशन की विशेष बात यह रही कि समय के साथ दौड़ते हुए पुलिस ने केवल तकनीक पर ही भरोसा नहीं किया, बल्कि स्थानीय सूचना तंत्र, फील्ड वेरिफिकेशन और दोनों जिलों की पुलिस के बेहतर तालमेल को भी समान महत्व दिया. यही कारण रहा कि संवेदनशील मामले में सफलता मिली. कोतवाली और जयपुर पुलिस की टीमों के प्रयास से पहुंचे किशोरी तक पुलिस अधीक्षक कुमार ने बताया कि ऑपरेशन की निगरानी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भागचंद मीणा एवं वृत्ताधिकारी हर्षराज सिंह खरेड़ा के सुपरविजन में की गई. कोतवाली थाना पुलिस और जयपुर पुलिस की संयुक्त टीम ने लगातार प्रयास करते हुए किशोरी को सुरक्षित उसके परिजनों तक पहुंचाया. इस अभियान में कोतवाली थाना से उप निरीक्षक बिहारीलाल एवं कांस्टेबल महेन्द्र कुमार तथा जयपुर पुलिस आयुक्तालय के सिंधी कैंप थाना प्रभारी माधो सिंह सहित तकनीकी शाखा और पुलिस टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही.