संस्कार अगर स्थिर रहें तो मनुष्य कभी नहीं भटकता कभी नहीं हारता :आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज
🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏🌹🌹"सादर जय सियाराम"
🌸"आध्यात्मिक यात्रा"🌸
संस्कार युक्त जीवन ही सच्चा जीवन है ।
साधन बदलते रहते हैं , परिस्थितियां बदलती रहती हैं ।
पर संस्कार अगर स्थिर रहें तो मनुष्य कभी नहीं भटकता कभी नहीं हारता ।
संस्कार हमें सोचने का ढंग देते हैं , बोलना का ढंग देते हैं , और जीने का ढंग देते हैं ।
जब संस्कार युक्त जीवन होता है तब उर्जा दिशा पाती है , इसलिए पहले संस्कार फिर साधन ।
क्योंकि संस्कार ही जीवन को ऊंचा रखता हैं ।
संसार में साधन आता जाता रहता हैं ।
पैसा , पद , सुविधा सब कुछ बदल जाता बदल सकता हैं ।
पर जो नहीं बदलता , जो मनुष्य को मनुष्य बनाता है , वह है संस्कार ।
संस्कार ही सोच को शुद्ध करता हैं ।
और वाणी को मधुर करता है ।
जब जीवन संस्कार युक्त हों तो साधन भी सही दिशा में चलता है ।
और जब साधन सही दिशा में हों तो जीवन-युद्ध जीवन सरल हो जाता है ।
संस्कार युक्त जीवन के लिए प्रमुख तीन बातें सबसे ज्यादा काम आती हैं ।
विचारों की शुद्धि जो हम सोचते हैं , वही धीरे-धीरे हमारा स्वभाव बन जाता है ।
इसलिए संगत , साहित्य और स्मरण शुद्ध रखना आवश्यक है
संस्कार से ही मनुष्य परिवार , समाज और देश के लिए उपयोगी बनता है ।
आइए आज से अपने व्यवहार और अपने विचारों में संस्कार को पुनः प्रतिष्ठित करें ,
आपका मार्गदर्शक आपके पूज्य गुरुदेव ,
[आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज]
संपूर्ण विश्व ,
संपर्क करें:-6396372583,
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