मातु दिवस पर आप सबको सहृदय आभार व्यक्त करता हूं: आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज
🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏🌹🌹"सादर जय सियाराम"
जब एक जिज्ञासु सद्गुरु के शरण में आता तो सद्गुरु ब्रह्मस्वरूपणी मां बनकर उसे अपने ममतामयी आंचल में समेट लेते है ।
ब्रह्मज्ञान प्राप्ति के बाद जो साधक उस आंचल में स्थिर हो जाता है ।
उसे संसार की धूप झूलसा नहीं पाती ।
जब जीवन की तपती धूप में मन
थक जाता है ।
तब एक ही शरण है सद्गुरू का ममतामई आंचल जहां मिलती है शांति , जहां मिलती है ब्रह्मज्ञान , और जहां साधक अपने ही भीतर ईश्वर को पा लेता है ।
गुरुदेव पूर्ण मां होते हैं एक जनम के नहीं अपितु जनम-जनम के ,
मातु दिवस पर आप सबको सहृदय आभार व्यक्त करता हूं ।
आपका मार्गदर्शक आपके पूज्य गुरुदेव ,
[आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज]
संपूर्ण विश्व ,
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