धाम श्वास-श्वास माता जानकी बसे , रोम-रोम में राम: आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज
🙏🙏🌹🌹🙏🙏🌹🌹"सादर जय सियाराम"
मन पुरुषोत्तम का दास हो , अयोध्या हो धाम श्वास-श्वास माता जानकी बसे , रोम-रोम में राम ।
धन्य है वो मन जो भगवान पुरुषोत्तम का दास बन जाएं ।
धन्य है वह हृदय जो अयोध्या धाम बन जाए ।
हर श्वास में मां जानकी का वास , रह रोम में भगवान श्रीराम का निवास यही तो पर सिद्धि है ऐसा जीवन पाकर तो मानव जन्म सार्थक हो जाए ।
जब मन पुरुषोत्तम दास बन जाएं , तो फिर अपना कुछ बचता ही नहीं न अपनी इच्छा , न अपना मान जैसा स्वामी चाहें वैसा दास चले यही तो प्रपत्ति है , यही तो शरणागति है ।
अयोध्या बाहर नहीं अपितु अपने अंदर यानी भीतर बसती है ।
जिस हृदय भगवान पुरुषोत्तम राम बसें वह हृदय अयोध्या है ।
और जहां अखंड एवं अद्भुत श्रीसीताराम नाम संकीर्तन चल रहा हो , वही सरयु बहती है , वही कनक भवन है ।
ये अवस्था तो संतों को भी दुर्लभ है ।
जो ऐसा भक्त संत है वो वास्तव में चलता फिरता तीर्थ है ।
ऐसे जीवन के सामने चारों पुरुषार्थ मुक्ति भी तुच्छ लगने लगती है । हल्की लगने लगती है
यह जो भाव है हम जैसों के लिए भी आदर्श है ।
आपका मार्गदर्शक आपके पूज्य गुरुदेव ,
[आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज]
🙏🙏🌹🌹🙏🙏🌹🌹
.jpg)