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अमृत काल का असली अमृत: जहाँ हाथी चींटी से हार गया, मोदी जी विश्व गुरु बने और ट्रंप साहब ने ईरान को “टावर तोड़” मिसाइल से सिखा दिया सबक!

 ब्यूरो रिपोर्ट TTN 24 NEWS 

नमस्कार दोस्तों!

अमृत काल का असली अमृत: जहाँ हाथी चींटी से हार गया, मोदी जी विश्व गुरु बने और ट्रंप साहब ने ईरान को “टावर तोड़” मिसाइल से सिखा दिया सबक!

(एक व्यंग्यात्मक, कटाक्षपूर्ण, थोड़ा मीठा-कड़वा, थोड़ा मस्त, थोड़ा तंज भरा लेख – आपके चैनल के संपादक, अधिवक्ता, लीगल एडवाइजर और नेशनल ब्यूरो हेड की कलम से)

भाई साहब, ४० दिन हो गए।

ईरान-इजरायल-अमेरिका का “महायुद्ध” चल रहा था। खाड़ी में तेल की क़ीमतें आसमान छू रही थीं, बच्चे शहीद हो रहे थे, घर बर्बाद हो रहे थे। लेकिन आखिरकार तीनों तानाशाहों को क्या मिला?

केवल अपना ego।

इजरायल में चुनाव आने वाले थे, लोकप्रियता गिर रही थी, तो नेटanyahu साहब ने सोचा – “चलो, छोटा-सा ईरान तोड़ देते हैं।”

ट्रंप साहब अमेरिका में अपनी “लोग पढ़ना” (लोकप्रियता) बढ़ाने के चक्कर में सोचे – “अरे, ईरान को एक झटके में खत्म कर देंगे, वोट बैंक पक्का!”

पर भाई… हाथी इतना बड़ा जानवर, उसे भूल गया कि सूंड के अंदर एक छोटी-सी लाल चींटी घुस जाए तो हाथी पागल होकर मर जाता है।

अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर “टावर तोड़” मिसाइलें दागीं।

ईरान ने जो मिसाइलें दागीं… वो सीधे अमेरिका-इजरायल के टारगेट पर लगीं।

नतीजा? तीनों देशों के तानाशाह खुद ही तबाह।

और हमारे देश में?

मोदी जी का अमृत काल!

गोदी मीडिया २४ घंटे चिल्ला रहा था –

“मोदी जी विश्व शांति के दूत हैं!”

“ट्रंप साहब मोदी जी के परम मित्र हैं, एक फोन कर देंगे तो युद्ध रुक जाएगा!”

“रूस-यूक्रेन युद्ध भी मोदी जी के कहने पर रुका था ना!”

अरे भाई, जो पाकिस्तान के साथ शीश फायर अमेरिका के राष्ट्रपति के कहने पर होता है, वो अपना युद्ध तो रोक नहीं पाया… दूसरे का कैसे रोकता?

मोदी जी जहां जाते, वहां रोड शो।

चाहे युद्ध हो रहा हो, चाहे देश में गैस की लाइन लग रही हो, चाहे पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू रही हों।

सूट-बूट नए-नए सिलवाने पड़ते हैं ना? घर में रखे-रखे धूल न पड़ जाए।

देश में पांच राज्यों में चुनाव?

अरे कोई टेंशन नहीं!

मोदी जी मंच पर खड़े होकर बोलते हैं –

“भाई-बहनों, इस देश में किसी चीज की कोई कमी नहीं है!

जो कह रहा है कमी है, वो विपक्षी एजेंट है।

गैस सिलेंडर की लाइन? वो विपक्ष के नेता लगवा रहे हैं।

महंगाई? अफवाह है।

रोजगार? अरे पकोड़े बेच लो, बीटेक, इंजीनियरिंग, B.Ed क्या पड़े हो?”

और अगर कोई गरीब आवाज उठाए –

“सरकार, अमृत काल में रोजगार कहाँ है?”

तो जवाब तैयार –

“लात-जूता, पुलिस की डंडा और चारदीवारी वाला जेल।”

क्योंकि अमृत काल में आलोचना = राष्ट्र-विरोध।

याद है जब युद्ध शुरू हुआ था?

पूरे गोदी मीडिया में मोदी जी को “विश्व गुरु” घोषित कर दिया गया था।

पर पाकिस्तान, जो विश्व का आतंक का अड्डा माना जाता है, उसने ईरान-इजरायल के बीच शांति का दूत बनकर स्विच फायर कर दिया।

और हमारे विश्व गुरु?

अमेरिका ने कुछ नहीं पूछा, तो बोले – “हम दूसरे देश की दलाली नहीं करते!”

अरे साहब, दलाली करने के लिए तो कोई पूछे तब ना!

ट्रंप साहब ने ट्वीट कर दिया – “मेरे कहने पर भारत-पाकिस्तान सीजफायर”

मोदी जी को पता भी नहीं चला।

फिर भी मानना पड़ा।

क्योंकि मोदी जी तो आसमान से टपके हैं।

मां ने पैदा नहीं किया।

(ये हम नहीं कह रहे, ये उनके भक्त कहते हैं।)

अब आइए असली अमृत काल की ओर।

अयोध्या में भगवान राम का मंदिर बन गया।

जाइए, भूख-प्यास भूल जाइए।

मोदी जी भगवान राम को उंगली पकड़कर ले आए थे (भाजपा की पुरानी फोटो याद है ना?)।

अब भक्तों के लिए सवाल – भगवान राम बड़े या मोदी जी बड़े?

और सुरक्षा?

करोड़ों रुपये खर्च।

कमांडो को बिजली के खंभे के पीछे छुपा दिया जाता है।

असम में चाय बागान में महिलाओं को नए कपड़े पहनाकर “लाइट-कैमरा-एक्शन” कराया गया।

मोदी जी नाच रहे थे, कमांडो छुपा हुआ था।

अब तो भाजपा के अपने ही बड़े-बड़े नेता और गुजरात की लेखिका (जो पहले “मोदी ना मां” लिखती थीं) अब “मोदी विरोधी” लिख रही हैं।

गंभीर आरोप।

पार्टी ने एक्शन लिया?

नहीं।

क्यों?

क्योंकि अमृत काल में सच्चाई भी “विपक्षी साजिश” है।

तो दोस्तों,

यह है हमारा अमृत काल।

जहाँ ईरान-इजरायल-अमेरिका का युद्ध ४० दिन चला,

हमारे नेता सूट बदलते रहे,

गोदी मीडिया “विश्व गुरु” गा रहा था,

और गरीब को कहा गया – “भगवान राम का नाम लो, भूख भूल जाओ।”

पाकिस्तान ने शांति का दूत बनकर बाजी मार ली।

हमारे विश्व गुरु चुपचाप “नेहरू जी का दोष” बता रहे हैं।

अरे भाई,

अमृत काल तो आ गया,

पर अमृत कहाँ है?

जय श्री राम।

जय मोदी।

जय अमृत काल।

(बाकी सब भाड़ में जाएं।)

— आपका वही व्यंग्यात्मक, कटाक्षी, मस्त, तंज भरा नेशनल ब्यूरो हेड।

(जो साधारण सा भारतवासी है, दो वक्त की रोटी के लिए मेहनत करता है, और बोलने का हक अभी भी मानता है।)

अब आप बताइए…

क्या सचमुच अमृत पी लिया है, या सिर्फ़ स्वाद चख रहे हैं?


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