ब्यूरोचीफ शैलेन्द्रसिंह बारडोली गुजरात
स्थानीय स्वराज चुनाव मे (गांडॉ विकास) कार्यों के हिसाब वर्तमान सरकारसे मांगने मांडवी तालुका लीमधा गांव के मतदाताओंने चुनाव बहिष्कार का बोर्ड लगाया।
मांडवी तालुका का लीमधा गांव, जो पिछले दो दशकों से विकास से वंचित रहा है, अभी भी बुनियादी सुविधाओं से वर्तमान समयभी वंचित है।पिछले बीस सालों से विकास की प्रतीक्षा कर रहे लीमधा गांव के वंचित लोगों का दुख अब चुनाव के दौरान किए गए बेतहाशा विकास वादों का हिसाब मांग रहा है। चुनाव आते ही विकास के वादों की बाढ़ आ जाएगी। ऐसा लगता था की राम राज्य जैसे सुविधा वाला विकास होगा।
चुनाव खतम नेता जीते वोही वादे से बंधे नेता पांच साल तक गिरनार की गुफा में ध्यान करने चलेजाने कारण विकास से वंचित गांवमे और बिजली, पानी, सड़कों जैसी बुनियादी सुविधाओं से आजभी वंचित हैं। स्वराज के चुनावों का इंतजार कर रहे मांडवी तालुका का लीमधा गांव के लोगों के लिए किए गए वादों को याद दिलाने का यह एक सुनहरा अवसर स्थानीय स्वराज चुनाव आया।बीस सालोसे भाजपा शासन के बीते समय ग्रामीण विभिन्न योजनाओं का लाभ गांव को दिलाने में आजतक नाकाम सरकार में शासन करनेवाले राजकीय स्थानीय नेताओं ने लिमघा गांव के नागरिकों को केवल शहद जैसी मीठी-मीठी बातो में पुरे गावकी जनताकों उलझाते रहे।सही मौकेपर जनता ने एकजुट होकर विकास के नाम पर भाषण देने वाले नेताओं के खिलाफ चुनाव का बहिष्कार करते हुए बैनर लगाए और विकास से वंचित रहने के कारण प्रांतीय अधिकारी को शिकायत का ज्ञापन सौंपकर अपना दुख व्यक्त किया।
स्थानीय सुशासन चुनावों मांडवी के लिमधा गांव के निवासियों ने जिला और तालुका पंचायत चुनावों का सामूहिक बहिष्कार करने का दृढ़ निर्णय लिया है। इस संबंध में गांव के मतदाताओं ने मांडवी प्रांत के निर्वाचन अधिकारी और उप कलेक्टर को लिखित याचिका भेजकर अपनी नाराजगी व्यक्त की है।
ग्रामीणों का मुख्य आरोप यह है कि लिमधा एक दूरस्थ गाँव है और यहाँ बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। सड़कें, श्मशान घाट और प्राथमिक विद्यालय जैसी अवसंरचना की स्थिति अत्यंत दयनीय है। इसके अलावा, विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाएँ, रोजगार सहायता और कृषि लाभ गाँव के सबसे दूरस्थ हिस्से के लोगों तक नहीं पहुँच पाते हैं।
ग्रामीणों ने याचिका में कहा है कि निर्वाचित प्रतिनिधियों और संगठन के पदाधिकारियों से कई बार अनुरोध करने के बावजूद कोई ठोस परिणाम नहीं निकला है। यह भी गंभीर रूप से आरोप लगाया गया है कि सत्ताधारी दल के नेताओं के बीच आंतरिक कलह के कारण गांव का विकास बाधित हुआ है।
इस विरोध के तहत, ग्रामीणों ने फैसला किया है कि किसी भी दल के उम्मीदवार को गांव में चुनाव प्रचार करने या वोट मांगने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यदि कोई उम्मीदवार जबरदस्ती प्रवेश करने का प्रयास करता है, तो उसका कड़ा विरोध किया जाएगा। ग्रामीणों ने किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए प्रशासन से पुलिस सुरक्षा की भी मांग की है।


