ब्यूरोचीफ शैलेन्द्रसिंह बारडोली गुजरात
तापी जिले के कुकरमुंडा पुलिस ने साइबर धोखाधड़ी के मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया कंपनी की एजेंसी मुहैया कराने के लालच में फंसाया गया था।
गुजरात में हर दिन हर घंटे साइबर अपराध का शिकार होरहे लोगोकी संख्या बढ़ रहीहैं। सरकार ने विभिन्न साइबर धोखाधड़ी मामलों को सुलझाने के लिए एक अलग टीम का गठन किया है, लेकिन प्रतिदिन सामने आ रहे साइबर धोखाधड़ी के मामलों की संख्यासे संकेत मिलताहै कि साइबर अपराधी पुलिसको चकमा देने की कोशिश कर रहे सरगना अपनी चालों में कामयाब हो रहे हैं। ऐसी ही एक घटना तापी जिले के कुकरमुंडा पुलिस स्टेशन में घटी। एक गिफ्ट हैम्पर बनाने वाली कंपनी की एजेंसी हासिल करने के लालच में साइबर धोखाधड़ी के सरगना को पुलिस ने पकड़ लिया है।सूरत डिवीजन के पुलिस महानिरीक्षक और तापी के पुलिस अधीक्षक जे.एन. देसाई और आई.एन. परमार निज़र डिवीजन के पुलिस उप अधीक्षक के निर्देशोंके अनुसार, कुकरमुंडा पुलिस स्टेशन को साइबर अपराध करने वाले अपराधियोंके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गएथे।
शिकायतकर्ता के अनुसार, मुंबई के मलाड ईस्ट स्थित नूरकास्टल को-ओ. हाउसिंग सोसाइटी लिमिटेड के फ्लैट नंबर 603 में रहने वाले मोहम्मद यूसुफ अब्दुल सिद्दीकी ने शिकायतकर्ता को एक उपहार भेंट करके भारी कमीशन का लालच दिया। शिकायतकर्ता के बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा, कुकरमुंडा स्थित बैंक खातेसे, उसके चचेरे भाई हसनैन एनुलहक मंसूरी की यूपीआई आईडी और उसके मित्र फैजान अहमद घांची की गूगल पे आईडी से अलग-अलग तारीखों पर कुल 2,50,000 रुपये का ऑनलाइन लेनदेन करने के बाद, शिकायत कर्ताको न तो उपहार भेंट की और कमीशन नहीं देनेपर ऑनलाइन ट्रांसफर की वापसी की मांग के बावजूद पैसे नहीं लौटाए। अंततः, शिकायतकर्ता ने कुकरमुंडा पुलिस स्टेशन में धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई थी।
पुलिस स्टेशन में दर्ज शिकायत के बाद, कुकरमुंडा पीआई, आई.डी. देसाई और पुलिसकर्मियों रविभाई, मेहुलभाई, कमलेशभाई और जनकभाई की संयुक्त टीम ने तकनीकी जांच और मानवीय सहायता की मदद से, मुंबई के मलाड ईस्ट स्थित नूर कास्तल को-ओ. हाउसिंग सोसाइटी लिमिटेड के फ्लैट नंबर 603 में रहने वाले आरोपी मोहम्मद यूसुफ अब्दुल सिद्दीकी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ के दौरान, साइबर धोखाधड़ी के अपराध में शामिल शशांक सिंध और गौतम मुलचंद गुप्ता को वांछित घोषित किया गया। गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी के अपराध के लिए कानूनी कार्रवाई की गई और आगे की जांच जारी रखी गई।
यहां यह उल्लेख करना उचित होगा कि साइबर धोखाधड़ी करने वाले को यदि अधिकारी कटघरे में लाने के लिए अपराधी तक पहुंचने में असमर्थ होता है, तो कुछ मामलों में, आरोपी अपराध करने के बाद अपना स्थान बदल लेते हैं, इसलिए पुलिस उन्हें पकड़ नहीं पाती है बल्कि अपराध को सुलझाने का प्रयास करती है।
ऐसीही धोखाधड़ी के मामले सुलझाने की कामयाबी कुकरमुंडा पीआई, आईडी, देसाई और उनकी टीम ने सुनियोजित जांच के माध्यम से आरोपी तक सुरक्षित पहुंचने में बड़ी सफलता हासिल की।
