व्यक्ति निष्काम भाव से कर्म करता है:आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज
🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏🌹🌹"सादर जय सियाराम"
"यदा ते मोहकलिलं बुद्धिवर्यतितरिष्यति ।
तथा गन्तासि निर्वेदं श्रोतस्य श्रुतस्य च ।।"
"निष्काम: कर्म कुवंर्योत् कर्मफलं हि तस्य न ।"
निष्काम वृत्ति और निष्काम स्थिति ,
निष्काम वृत्ति: निष्काम वृत्ति का तात्पर्य है इच्छाओं और कामनाओं से मुक्त होना ।
जब हम किसी कार्य को बिना किसी व्यक्तिगत लाभ या इच्छा के करते हैं तो वह निष्काम वृत्ति कहीं जाती है ।
यह एक मानसिक स्थिति है जहां हम अपने कार्यो को भगवान की पूजा मानकर करते हैं ।
निष्काम स्थिति: निष्काम स्थिति यह एक उच्च अवस्था है जहां व्यक्ति की सभी कामनाएं और इच्छाएं समाप्त हो जाती है ।
इस स्थिति में , व्यक्ति आत्म-संतुष्टि और परमात्मा से जुड़ा रहता है ।
यह एक प्रकार की जीवन मुक्त स्थिति है ।
जो व्यक्ति निष्काम भाव से कर्म करता है , उसका कर्मफल से कोई संबंध नहीं रहता है ।
(गीता 3:19)
इन दोनों अवधारणाओं का उद्देश्य हमें आत्म-साक्षात्कार और मोक्ष की ओर ले जाता है ।
आपका मार्गदर्शक आपके पूज्य गुरुदेव ,
[आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज]
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संपर्क सूत्र:6396372583,
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