Type Here to Get Search Results !
BREAKING
विज्ञापन
TTN24 न्यूज चैनल समस्त राज्यों से डिवीजन हेड, मार्केटिंग हेड एवं ब्यूरो रिपोर्टर बनने के लिए शीघ्र संपर्क करें — 📞 +91 9956072208, +91 9454949349, ✉️ ttn24officialcmd@gmail.com — साथ ही चैनल की फ्रेंचाइजी एवं TTN24 पर स्लॉट लेने के लिए संपर्क करें — 📞 +91 9956897606 — ☎️ 0522 3647097 | आपका पसंदीदा हिंदी न्यूज चैनल TTN24 अब उपलब्ध है सभी डिजिटल केविल नेटवर्क पर — जिओ टीवी, जिओ फाइबर चैनल नंबर 543, टाटा प्ले चैनल नंबर 2075, E-star डिजिटल केविल चैनल नंबर 201, DTH लाइव टीवी, स्मार्ट टीवी, एवं सभी एंड्रॉइड बेस्ड ओटीटी प्लेटफार्म एवं यूट्यूब फेसबुक Live 24x7. चैनल से जुड़ने के लिए शीघ्र संपर्क करें — 📞 +91 9956072208 | Head Office : llnd Floor Regency Tower, Shivaji Marg, Hussainganj, Lucknow (U.P.) 226018. Managing Director : Avneesh Dwivedi — 📞 +91 9956072208, +91 9794009727. समाचार, विज्ञापन एवं चैनल में किसी प्रकार की शिकायत एवं सुझाव के लिए कॉल करें — 📞 +91 9956072208

हर बात जीतने के लिए नहीं अपितु समझने के लिए करों: आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज

हर बात जीतने के लिए नहीं अपितु समझने के लिए करों: आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज

🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏🌹🌹

        "सादर जय सियाराम"

"उदासीनवदासीनो गुणैयों न विचाल्यते"

जो उदासीन की तरह रहता है वह कभी विचलित नहीं होता है 

"नाहन प्रकाश: सर्वस्य योगमाया समावृत:" 7:25 ,

भगवान गीता में कह रहे हैं कि मैं सबके सामने प्रकट नहीं होता जहां भाव नहीं वहां मैं अपने को छिपा लेता हूं ‌।

मेरा आभाव ही वहां पर उचित है ।

जहां भाव न मिले वहां रुक जाना इससे तीन दोषों से बचते हैं ।

1- विवाद से क्षय बचते हैं : भाव‌ बिना चर्चा कुतर्क बन जाती है ।

पर जहां सुनने वाला ही न हो वहां बोलना नई बाधा बना देता है ।

2- अपनी भाव की रक्षा होती है :

3- सामने वाले का भी हित होता है :

हम तो केवल व केवल शास्त्र संवत एवं संत-महापुरुषों की वाणी के आधार पर परिसंवाद करता हूं सत्संग करता हूं ।

"तद्विद्धि प्रणिपातेन परिप्रश्नेन सेवया" शिष्यवत भाव सबसे पवित्र भाव होता है जो‌ अपने तत्वदर्शी पूज्य गुरुदेव के पास जाकर प्रणाम प्रश्न और सेवा से जाने ।

"भाव का आभाव है जहां संवाद नहीं रुकता जहां संवाद रुकता है ।

वहां संवाद रुकता है वहां भाव का आभाव होता है ।

भाव = हृदय का जुड़ाव + सुनने की इच्छा + सम्मान ,

भाव‌ तर्क नहीं अपितु प्रेम अवश्य होता है ।

भाव में मैं सही -तू गलत नहीं होता है‌ ।

भाव में सत्य की खोज होता है ।

गीता कहती है : श्रद्धावान् रहते ज्ञानम्" 4:39 

श्रद्धा= भाव । जहां श्रद्धा है , वहां ज्ञान उतारा है ।

भाव में मौन भी संवाद है , 

भाव जीवित हो तो संवाद नहीं रुकता है ।

भाव हो तो विरह भी बन जाता है ।

संवाद को पूजा बनाओं : हर बात जीतने के लिए नहीं अपितु समझने के लिए करों ।

भाव= तेल , संवाद = दीपक ।

तेल है तो दीपक जलता रहेगा आंधी में भीलौ हिलेगी पर बुझेगी नहीं ।

तेल बीत गया तो दीपक कितना भी सुन्दर हो , बुझ जाएगा ।

संवाद को पूजा बनाओं : यह तो पूरा जीवन बदल देने वाला है ।

पूजा का तात्पर्य है मन वचन कर्म से एकाग्र‌ होकर समर्पण ।

संवाद को पूजा बनाना= हर बातचीत को पवित्र यज्ञ बना देना ।

1- पूजा की तैयारी= संवाद की तैयारी ।

पूजा में संवाद में ।

*स्नान * मन को अहं-क्रोध को धोकर आओं

*आसन * स्थिर बैठो पूरी तरह से उपस्थिति दो ।

*संकल्प * मैं जीतने नहीं समझने आया हूं यह भाव रखो 

*दीपक** भाव का दीपक जलाओ , जैसे बिना तैयारी की पूजा जैसे औपचारिक है ।

वैसे ही बिना भाव का संवाद केवल शव्दों का शोर है ।

2-पूजा के पांच अंग = संवाद के पांच अंग ।

1-श्रवण= सुनना 

पूजा में घंटा -शंख ध्यान से सुनते हैं ।

संवाद में सामने वाले का दुःख,भय , बात ध्यान से सुनो बीच में मत टोको

2- कीर्तन पूजा = पूजा सत्य स्तुति बोलते हैं ।

संवाद में सत्य , हित , प्रिय बोलों

कटु सत्य भी नहीं , मीठा झूठ भी नहीं -प्रिय सत्य ।

3- स्मरण= ध्यान रखना : पूजा में इष्ट को याद रखते हैं ।

संवाद में याद रखो - सामने वाला भी पुरुषोत्तम का अंश है ।

उसका अपमान , प्रभु का अपमान है ।

4- पादसेवन = सेवा+ भाव पूजा में चरण पखारते हैं ।

संवाद में अहंकार दो दो ।

"मैं ग़लत हो सकता हूं - यह भाव चरण सेवा है ।

5- अर्पण=समर्पण 

पूजा में फल फूल चढ़ाते हैं ।

संवाद में अपनै अपना मत चढ़ा दो - शायद आप सही हों कहकर फल अर्पित कर दें ।

सुबह का संकल्प : आज हर संवाद को पूजा बनाऊंगा कम बोलूंगा , ज्यादा सुनूंगा ।

दोपहर का जांच : कितने संवाद में अहं आया ?

रात का अर्पण: हे पुरुषोत्तम , आज जो शव्द-बाण चले हों ।

उन्हें क्षमा करो ।

बातचीत मत करों , आरती करों ।

जब शव्द निकलें तो लगे कि फूल चढ़ रहा हैं ।

जब सुनो तो लगे कि मंत्र सुन रहें हो‌ ।

जब मौन‌ हो तो लगे कि ध्यान लग गया ‌।

और जिस संवाद के बाद मन हल्का हो जाए , हृदय पवित्र हो जाएं समझो पूजा सफल हो गयी ।

और सबसे बड़ी योग्यता यही है कि हर मिलने वाला पुरुषोत्तम का रुप है ।

आपका मार्गदर्शक आपके पूज्य गुरुदेव ,

[आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज]

संपूर्ण विश्व ,

संपर्क सूत्र:-6396372583,

🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏🌹🌹

Youtube Channel Image
TTN24 | समय का सच www.ttn24.com
Subscribe