Etawah News: प्रेमा अम्बेडकर ने बाबा साहेब के पिता के निधन की मार्मिक कथा सुनाई, भावुक हुए श्रद्धालु
रिपोर्ट एम एस वर्मा, मनोज कुमार TTN 24 NEWS
उन्होंने बताया कि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद रामजी सकपाल ने अपने पुत्र को उच्च शिक्षा दिलाने का संकल्प निभाया। उनके संघर्ष, अनुशासन और त्याग की गाथा सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
जैसे ही कथा में पिता के निधन का प्रसंग आया, पंडाल में सन्नाटा छा गया और कई लोगों की आंखें नम हो गईं। प्रेमा अम्बेडकर ने कहा कि यह घटना बाबा साहेब के जीवन के सबसे दुखद क्षणों में से एक थी, जिसने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया, लेकिन उन्होंने अपने पिता के सपनों को पूरा करने का संकल्प और भी मजबूत किया।कार्यक्रम के तीसरे दिन भी भारी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही। इस दौरान दिनेश कुमार उर्फ लाखन सिंह (जैनपुर नागर), रामगोपाल (नाकऊ) सहित अन्य सात लोगों ने कथा वाचिका प्रेमा अम्बेडकर को नोटों की माला पहनाकर सम्मानित किया।
इसी बीच जसवंतनगर थाना प्रभारी निरीक्षक कमल भाटी ने बौद्ध कथा पंडाल में पहुंचकर जायजा लिया। इस अवसर पर स्थानीय पत्रकार सुशील कान्त ने उन्हें डॉ. भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा भेंट कर सम्मानित किया।अंत में श्रद्धालुओं ने बाबा साहेब के विचारों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया और आयोजन की सफलता में सक्रिय भागीदारी निभाई।
कार्यक्रम में अर्जुन सिंह, हुकुम सिंह, भीम प्रकाश, आनंदप्रिय गौतम, कैलाश बाबू, राजेंद्र सिंह, भारत सिंह, अकल सिंह, चन्द्र प्रकाश, रंजीत बाबू, अशोक कुमार, ध्रुव सिंह (एडवोकेट), रमेश कुमार (डीलर), तिलक सिंह, रमाकांत, सुशील कान्त (पत्रकार), सत्येंद्र सिंह (मास्टर), सतीश बाबू, सचिन, मातादीन, महेश, मायाराम, गंगादीन सहित बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालु मौजूद रहे।
इसके अलावा कथा के अंतिम समय तक कांस्टेबल संजय सिंह, आलोक वर्मा, उपनिरीक्षक शुभम वर्मा एवं उपनिरीक्षक महेन्द्र सिंह भी कथा में उपस्थित रहे।


